बढ़ती उम्र में कब्ज़ की शिकायत होना आम बात है लेकिन कम उम्र में यह दिक्कत चिंता का विषय है। इसमें व्यक्ति को खान-पान और वर्कआउट में ध्यान देने की ज़रूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में कब्ज़ की शिकायत खराब लाइफ़स्टाइल और जंक फूड के सेवन का परिणाम है। दरअसल इससे पाचन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और भोजन सही से नहीं पच पाता। जिसे वजह से व्यक्ति को कब्ज़ की दिक्कत झेलनी पड़ जाती है।
इसके लिए लाइफ़स्टाइल में तब्दीली लाने की ज़रूरत है। साथ ही जंक या स्ट्रीट फूड से परहेज़ भी करना होगा। इसके अलावा आप योग की भी मदद ले सकते हैं। प्राचीन काल में योग ही इस दिक्कत से निजात दिलाता करता था। तो आइए जानतें हैं इन पांच योगासन के बारे में जिनकी मदद से हम इस दिक्कत पर आसानी से काबू पा सकेंगे।
बालासन
दो शब्दों से मिल कर बालासन शब्द बना है। इसका शाब्दिक अर्थ यह है कि बच्चे की तरह बैठना। इस योग को करने से पूरे शरीर में रक्त का संचार होता है। वहीं, पेट में खींचाव होने से पांचन तंत्र पर सही प्रभाव पड़ता है। इससे कब्ज़ की दिक्कत जल्द दूर हो जाती है।
धनुरासन
इस योग की मदद से पेट के अंगो में खींचाव पैदा होता है। साथ ही पेट पर दबाव पड़ने से उत्सर्जन की प्रक्रिया सुचारू रूप से काम करने लगती है। इससे बढ़ते वज़न पर को भी कम किया जा सकता है। इस योग को रोज़ाना करने की सलाह दी गई है।
आनंद बालासन
यह योग बिल्कुल बालासन के तरह है लेकिन इसे पीठ के बल लेटकर किया जाता है। बता दें कि जब खुश होता है तो वह अपने दोनों हाथों से अपने दोनों पैरों के अंगूठे को पकड़ लेता है। ठीक उसी तरह की मुद्रा में यह योग किया जाता है। इससे कब्ज़ में जल्द राहत मिलती है।
भुजंगासन
भूजंग और आसन शब्दों से मिलकर भुजंगासन शब्द बना है। वहीं, अंग्रेज़ी में हम इस आसन को कोबरा पोज़ कहते हैं। इस योग में व्यक्ति को सांप की तरह अपने धड़ कि आगे की ओर में उठाकर रखना होता है। इससे पाचन तंत्र मज़बूत होता है। इसे रोज़ करने से पेट से जुड़ी हर दिक्कत को दूर किया जा सकता है।
पद्मासन
पद्मासन-पद्म अर्थात कमल और आसन अर्थात बैठने की मुद्रा इन दो शब्दों से मिलकर बना है। जिस तरह कीचड़ में रहकर भी कमल स्वच्छ और ख़ूबसूरत रहता है उसी तरह भौतिक दुनिया में रहकर भी इस योग से आप स्वस्थ्य और सूखी रह सकते हैं। इससे कब्ज़ियत की शिकायत आसानी से दूर हो जाती है
अन्य खबरें पढ़ें सिर्फ यूथ एक्सप्रेस पर.