बॉलीवुड की दुनिया में किसको कब क्या करना पड़ जाएँ ये कोई नहीं कह सकता। जी हां भले ही एक्टर हो या एक्ट्रेस लेकिन फिल्मों में खुद को वास्तविक दिखाने के लिए दोनों को एक जितनी ही मेहनत करनी पड़ती है। जैसे कि फिल्म दम लगा के हईशा में भूमि पेडनेकर ने अपना वजन बढ़ाया था। यहाँ तक कि फिल्म सुल्तान में सलमान खान को भी पहले अपना वजन बढ़ाना पड़ा और फिर कम करना पड़ा था। ऐसे में अब एक फिल्म के लिए यह अभिनेत्री वजन बढ़ा रही है, ताकि यह खुद को फिल्म में रियल दिखा सके।
यह अभिनेत्री वजन बढ़ा रही खुद को रियल दिखाने के लिए..
गौरतलब है कि हम यहाँ जिस एक्ट्रेस की बात कर रहे है, वह कोई और नहीं बल्कि जाह्नवी कपूर है। जो जल्दी ही गुंजन सक्सेना की बायोपिक में नजर आने वाली है। आपको जान कर हैरानी होगी कि इस फिल्म में अपने किरदार के साथ इंसाफ करने के लिए जाह्नवी करीब आठ किलो वजन बढ़ाएंगी। जी हां उन्होंने अपनी कुछ तस्वीरें भी इंस्टाग्राम पर शेयर की है। जिसमे उनका थोड़ा सा बढ़ा हुआ वजन भी दिख रहा है। बहरहाल ऐसा दिखने के लिए जाह्नवी कपूर जिम में घंटों तक मेहनत करती है।
दरअसल इस फिल्म में जाह्नवी का किरदार काफी चुनौतियों से भरा हुआ है। अब उनकी पहली फिल्म में तो उन्होंने एक साधारण सी लड़की का किरदार निभाया था, लेकिन इस फिल्म में उन्हें शायद एक्शन भी दिखाना पड़े। यही वजह है कि गुंजन सक्सेना बायोपिक के लिए यह अभिनेत्री वजन बढ़ा रही है। यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि जाह्नवी कपूर के पास केवल यही एक फिल्म नहीं है, बल्कि उनके पास और भी कई सारे प्रोजेक्ट्स मौजूद है। यानि इस फिल्म की शूटिंग खत्म करने के बाद वह दोबारा अपने वजन पर काम करेंगी और खुद को मेन्टेन रखने की कोशिश करेंगी।
यह अभिनेत्री वजन बढ़ा रही, फिल्म में खुद को रियल दिखाने के लिए होगी इतनी मोटी Youth Express
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बॉलीवुड की दुनिया में किसको कब क्या करना पड़ जाएँ ये कोई नहीं कह सकता। जी हां भले ही एक्टर हो या एक्ट्रेस लेकिन फिल्मों में खुद को वास्तविक दिखाने के लिए दोनों को एक जितनी ही मेहनत करनी पड़ती है। जैसे कि फिल्म दम लगा के हईशा में भूमि पेडनेकर ने अपना वजन बढ़ाया था। यहाँ तक कि फिल्म सुल्तान में सलमान खान को भी पहले अपना वजन बढ़ाना पड़ा और फिर कम करना पड़ा था। ऐसे में अब एक फिल्म के लिए यह अभिनेत्री वजन बढ़ा रही है, ताकि यह खुद को फिल्म में रियल दिखा सके।
कहते है शब्दों को नाप तोल कर बोलने का काम जरा मुश्किल होता है, लेकिन हम तो वो है जो शब्दों को केवल नाप तोल कर ही नहीं बल्कि हर शब्द को हया की शुखियों में लपेट कर फूलो की तरह तरह चुन चुन कर लिखते है। यही हमारी पहचान भी है और यही हमारा हुनर भी..