आप सब ने महाभारत और पांच पांडवों के बारे में तो जरूर सुना होगा। बता दे कि इन पांच पांडवों की इकलौती माँ कुंती थी। जिनका इन पांचों के इलावा एक पुत्र और भी था। जिसका नाम कर्ण था। गौरतलब है कि कुंती ने अपने पुत्र कर्ण के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया था और इसी सच को छुपाने के कारण युधिषिठर ने यह श्राप स्त्री जाति को दिया था। जी हां यह बात उन्होंने पांचो पांडवों से छिपा कर रखी थी। वही अगर हम कर्ण की बात करे तो वह दुर्योधन का मित्र यानि दोस्त था। वह हमेशा दुर्योधन के साथ ही रहता था। ऐसे में जब कौरवों और पांडवों का युद्ध होता है, तब कुंती, कर्ण से बात करती है।
स्त्री जाति को दिया था युधिषिठर ने यह श्राप..
जी हां वह कर्ण से मिल कर उसे बताती है कि कर्ण उन्ही के ही पुत्र है। इसलिए वह पांडवों की हत्या न करे, क्यूकि पांडव उसके ही भाई है। हालांकि ये मुमकिन नहीं हो सका। वो इसलिए क्यूकि युद्ध में कर्ण कौरवों की तरफ से लड़ रहे थे। यही वजह है कि कर्ण का वध अर्जुन के हाथों हुआ। मगर इसमें कोई शक नहीं कि अपने भाई का वध करने के बाद पांडव बेहद उदास थे। दरअसल युद्ध खत्म होने के बाद कुंती ने कर्ण का रहस्य सभी पांडवों को बता दिया था। बता दे कि सच जानने के बाद सभी पांडवों को बेहद अफ़सोस हुआ था।
यहाँ तक कि इस सच को छुपाने के कारण युधिषिठर को अपनी माँ पर भी क्रोध आने लगता है। जिसके चलते उन्होंने यह श्राप पूरी स्त्री जाति को दिया था कि कोई भी स्त्री अधिक समय तक अपने पेट में किसी भी बात को छुपा कर नहीं रख पायेगी। जी हां तभी तो स्त्रियों के बारे में ये कहा जाता है कि उनके पेट में कोई बात नहीं पचती। दरअसल युधिषिठर को ऐसा लग रहा था कि कर्ण को वो अधिकार और सम्मान नहीं मिला, जो उन्हें मिलना चाहिए था। जी हां कर्ण पांडवों का बड़ा भाई था और ये सच पांडवों को बहुत देर से पता चला। जिसके कारण युधिषिठर ने नाराज हो कर स्त्रियों को यह श्राप दे डाला था।


