बॉलीवुड फिल्मों के सितारे में एक से बड़ कर एक कपड़े पहन के रौनक बिखेरते हैं। लेकिन आपके मन में यह जानने की जिज्ञासा तो ज़रूर होती होगी कि, आखिर बॉलीवुड फिल्मों में पहने गए लिबासों का क्या होता है? क्योंकि आपने देखा होगा कि फिल्मों में एक्टर और एक्ट्रेस एक ही गाने में कई कपड़े बदल लेते हैं।
क्या आपको पता है इन कपड़ों को कौन खरीदता है और फिर फिल्म की शूटिंग खत्म हो जाने के बाद इन कपड़ों का क्या होता है? आइए कुछ ऐसे ही सवालों के जवाब जानते हैं।
करीना का ड्रेस इतने लाख का
बॉलीवुड फिल्मों को दौलत, शोहरत, ग्लैमर और फैशन की दुनिया माना जाता है। फिल्म ‘हीरोइन’ में करीना कपूर ने 130 ड्रेस पहनकर अनोखा रिकॉर्ड बनाया था, तो वहीं ‘एक्शन रिप्ले’ में ऐश्वर्या राय ने 125 कॉस्ट्यूम पहने थे। फिल्म ‘रामलीला’ में दीपिका पादुकोण ने 30 किलो का लहंगा पहना था और फिल्म ‘कमबख्त इश्क’ के एक गाने में करीना कपूर ने ब्लैक कलर की ड्रैस पहनी थी जिसकी कीमत 8 लाख थी।
इसके अलावा आपने देखा होगा कि एक फिल्म में ही हीरो और हीरोइन कई ड्रेस बदल लेते हैं। लेकिन आपने इन सभी फिल्म स्टार्स को फिल्मों में पहने गए लिबासों को दुबारा किसी और फिल्म में पहने नहीं देखा होगा। तो आखिर फिल्मों में पहने गए लिबास का क्या होता है? क्या इनको बेकार या उतरन समझकर फेक दिया जाता है या फिर बाजार में बेच दिया जाता है?
कपड़ों का खर्च किसके हाथ में
प्रोडूसर या निर्माता वह व्यक्ति होता है जो फिल्मों में निवेश करता है अर्थात किसी फिल्म के बनने में होने वाले सभी खर्चों को ज़िम्मा उठाता है। एक निर्माता जो फिल्म बनाने में निवेश करता है उसे फिल्म का “बजट” कहा जाता है। इसमें अभिनेताओं को दिया जाने वाला शुल्क, तकनीशियनों, क्रू मेम्बर के आने-जाने, खाने और रहने और एक्टर्स द्वारा पहने गए कपड़ों का खर्चा भी शामिल होता है। इन खर्चों के अलावा फिल्म बनने के बाद इसके प्रमोशन पर किया जाने वाला खर्चा भी इसमें शामिल होता है।
इस तरह इस्तेमाल किया जाता उन कपड़ों का
यशराज प्रोडक्शन में बनी फिल्मों में सारे कॉस्ट्यूम पेटी में बंद कर के रख लिए जाते हैं। हर पेटी पर लेबल लगा होता है, जिससे पता चल जाता है कि किस फिल्म में किस लीड स्टार और सपोर्टिंग एक्टर ने कौन-कौन से कपड़े पहने थे। इसके बाद जब कभी इसी प्रकार के कपड़ों की जरूरत पड़ती है तो इन्हीं कपड़ों को दुबारा अदल बदल (मिक्स मैच) करके इस्तेमाल कर लिया जाता है।
जैसे कि, ऐश्वर्या राय ने ‘बंटी और बबली’ के गाने ‘कंजरा रे’ वाले आइटम सॉंग में जो चोली पहनी थी उसे 2010 में आई फिल्म बैंड बाजा बारात’ में एक बैकग्राउंड डांसर को पहनाया गया था।
सलमान का तौलिया डेढ़ लाख का
कई बार वस्त्रों को चैरिटी के लिए नीलाम कर दिया जाता है और इससे प्राप्त हुई राशि को समाज सेवा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सलमान के एक फैन ने उनका तौलिया डेढ़ लाख में खरीदा था। सलमान ने यह तौलिया फिल्म ‘मुझसे शादी करोगी’ में इस्तेमाल किया था।
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रजनीकांत और ऐश्वर्या राय की फिल्म रोबोट के कुछ आउटफिट नीलाम किए गए थे और इससे मिले पैसों को चैरिटी में दिया गया था। इसके अलावा फिल्म ‘देवदास’ में माधुरी दीक्षित ने जो हरे रंग का लहंगा पहना था वह लहंगा 3 करोड़ में बिका था।
कुछ प्रोड्यूसर सप्लायर को कपड़ों का कांटेक्ट दे देते हैं। टीवी प्रोड्यूसर राजन शाही के अनुसार वह किसी कपड़े के सप्लायर से टाइ-अप कर लेते हैं, जिसके बाद वह हर मौके के हिसाब से कपड़े मंगवाते हैं और उन्हें इस्तेमाल करने के बाद कपड़ों को वापस भिजवा दिया जाता है। और फिल्म की शूटिंग के बाद सप्लायर को कपड़े वापिस लौटा दिए जाते हैं जिससे उन्हें कम कीमत चुकानी पड़ती है।
इन सारे बिन्दुओं से यह स्पष्ट होता है कि, फिल्मों में पहनें गए लिबासों को बेकार समझकर फेका नहीं जाता है बल्कि इनको अन्य फिल्मों में या फिर चैरिटी के लिए इस्तेमाल कर लिया जाता है।
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