दोस्तों आज हम बात करने जा रहे है, क्रिकेट के भगवान के बारे में।क्रिकेट के ऐसे बहुत ही कम रिकार्ड्स होंगे जो इनके नाम न हो। जी हां दोस्तों, हम बात करने जा रहे है ‘सचिन तेंदुलकर’ के बारे में। क्रिकेट का वो भगवान जिसने 24 साल तक क्रिकेट को अपना सब कुछ दिया। बहुत ही कम उम्र में उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था।एक दौर था, जब सचिन तेंदुलकर मैदान पर आते थे, तो पूरा स्टेडियम और देश एक ही नाम के साथ गूंज उठता। ‘सचिन-सचिन’ लोग तब तक चिल्लाते, जब तब वो मैदान पर अपने जौहर दिखा रहे होते। एक भगवान की तरह उनकी पूजा की जाती।
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लेकिन इस ‘सचिन-सचिन’ आवाज़ की गूंज के पीछे किसी फैन की नहीं बल्कि ‘मास्टर ब्लास्टर’ की माँ की कहानी छिपी हुई है। सचिन तेंदुलकर बताते हैं कि ‘मुझे कभी नहीं लगा था कि सचिन-सचिन की ये आवाज़ उनके खेल छोड़ने के बाद भी जनता के बीच ज़िंदा रहेगी और मुझे मशहूर रखेगी, ये आवाज़ मैंने सबसे पहले अपनी मां से सुनी थी। जब मैं घर के नीचे खेलने भाग जाता, तो अकसर मां मुझे बुलाने के लिए सचिन-सचिन आवाज़ लगाती थीं|
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भारत का एकमात्र ऐसा क्रिकेटर, जिसे ‘भारत रत्न’ मिला है वो सचिन तेंदुलकर ही है। सचिन ने ये बात अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म की लॉन्चिंग पर बताई। ‘ए।आर।रहमान’ ने सचिन की इस डॉक्यूमेंट्री के लिए इस गाने को लिखा है। ए।आर।रहमान बताते हैं कि इस गाने को लिखने के लिए उन्हें लम्बा वक़्त लगा था। लेकिन सबसे बड़ी समस्या तब आई, जब उसके लिए धुन तैयार करनी थी। करीब 14 बार धुन को बनाया गया।



