आज शहीद राष्ट्रभक्त मंगल पांडेय का जन्म दिवस है। आइये जानते हैं क्या इसी आज़ाद देश के लिए मंगल पांडेय ने सन्ग्राम का बिगुल बजाया था।
भारत के स्वाधीनता की लड़ाई तो 1857 से पहले ही शुरु हो गई थी, लेकिन व्यपकता में इसकी शुरूआत 9 मई 1857 से माना जाता है।यही वो साल था जब अंग्रेजी सरकार से भारतीय जनता का शोषण के विरुद्ध बुलंद आवाज़ सीधे टकराई। अँग्रेज़ी हुकूमत को कई बड़े बदलाव करने पड़े। इस क्रांति की बड़ी विशेषता यह थी की राजा- प्रजा,अधिकारी- सिपाही,महिला- पुरुष हर वर्ग के लोग एक साथ आगे आए। इस क्रांति का नेतृत्व तात्या टोपे,महारानी लक्ष्मी बाई,मंगल पांडेय,बहादुर शाह ज़फर ,नाना साहेब,बेगम हज़रत महल,बिर्जिस कदर जैसे महान देश भक्त व वीर योद्धाओं के हाथ में था।
क्रांति के कारण
किसी एक कारण को लेकर हम प्रथम स्वतंत्रता सन्ग्राम को नहीँ समझ सकते। इसके पीछे कई सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक कारण थे। भले ही कुछ विद्वानों ने ‘mutiny of soldiers’ नाम देकर इसके महत्व को कम करना चाहा हो लेकिन ये भारतीय जनता का अन्याय के विरुद्ध पहला व्यापक सन्ग्राम था। ज़मींदार किसानों का खून चूस रहे थे और हमारे रक्षक कहलाने वाले राजा कुछ भी कर पाने में असमर्थ थे। वे विलासिता के वसीभूत स्वयं ही अंग्रेजी सरकार से सन्धि कर मह्फूज रहना चाहते थे। कुछ गिने चुने राजा ही अब भी देश की हिफाज़त में लगे हुए थे। महाराणा प्रताप,वीर शिवाजी,रानी लक्ष्मी बाई,बहादुर शाह ज़फर आदि पराक्रमी नरेश ही देश को आज़ाद देखना चाहते थे।
1857 और 21वीं सदी
देश अँग्रेज़ी शोषण से तो आज़ाद हो गया लेकिन शोषण से आज़ाद नहीँ हो पाया। हिंदी कवि धूमिल ने लिखा था
“क्या आज़ादी मात्र तीन रंगों का नाम है जिसे एक पहिया ढोता है,
या इसका कोई खास मतलब भी है”
कवि की इन पंक्तियों में एक टीस है जो आज़ाद देश की ग़ुलामी के कारण है।
आज़ादी के 40-50 साल पहले के प्रेमचंद के चरित्रों को हम आज भी अपने आस पास देख सकते हैं।क्यों किसान आत्म हत्या कर रहे हैं ? क्यों बेटियाँ सुरक्षित नहीँ हैं- ना गर्भ में और ना इस धरती में? क्यों लोकायुक्त की आवश्यकता पड़ी? इस लिए की अपने ही देश को खोखला करने वालों को पकड़ा जा सके? क्या इसी आज़ाद देश के लिए मंगल पांडेय ने सन्ग्राम का बिगुल बजाया था।