हाइपरटेंशन और हाई ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने के लिए इन बातों का खास ख्याल रखें

हाइपरटेंशन और हाई ब्लडप्रेशर

बिगड़ी लाइफ़स्टाइल से पनपने वाली हाइपरटेंशन एक ऐसी बीमारी है जो आज हर किसी को अपनी गिरफ्त में लेने की कोशिश में है। हाइपरटेंशन और हाई ब्लडप्रेशर को नियंत्रित नहीं किया जाए तो इनका हमारे स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ता है जैसे कि हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा। इस कारण जो लोग इसकी गिरफ्त में हैं या फिर जिनका बीपी घटता बढ़ता रहता है उन्हें रेगुलर चेकअप कराने की सलाह दी जाती है।

जो लोग हाइपरटेंशन और हाई ब्लडप्रेशर के शिकार हैं उन्हें ब्लड प्रेशर चेक कराने का आइडियल समय मालूम होना चाहिए। इसे चेक कराने के लिए या तो डॉक्टर के पास जाया करें या घर पर खुद से अपना जांच लें। सटीक ब्लड प्रेशर चेक कराने के लिए आपकी शारीरिक गतिविधि, आपके खाने का समय, आपकी दिनचर्या अहम भूमिका निभाती है।

रीडिंग को कैसे समझा जाए

बीपी मापने से पहले अपको यह मालूम होना चाहिए कि नॉर्मल ब्लड प्रेशर और हाई ब्लड प्रेशर में क्या अंतर है। बीपी मापने के लिए दो नंबर होते हैं एक सिस्टोलिक (ऊपर का) और दूसरा डायस्टॉलिक (नीचे का)। इसे पारा के मिलीमीटर में मापा जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार ब्लड प्रेशर की पांच श्रेणियां होती हैं। आइए जानते हैं अब उन पांच श्रेणियों के बारे में।

ब्लड प्रेशर की श्रेणियाँ

सामान्य ब्लड प्रेशर : 120/80 मिमी एचजी से कम ब्लड प्रेशर को सामान्य माना जाता है। वहीं, एलिवेटिड की स्थिति में रीडिंग 120-129 सिलोस्टिक और 80 मिमी एचजी डायस्टोलिक से कम होती है। ऐसे में उच्च हाई ब्लड प्रेशर होने की संभावना होती है।

हाई ब्लड प्रेशर के पहले चरण में रक्तचाप लगातार 130−139 सिस्टोलिक या 80−89 मिमी एचजी डायस्टोलिक से होता है। वहीं, दूसरे चरण में रक्तचाप लगातार 140/90 मिमी एचजी या अधिक होता है। और आखरी स्टेज में ब्लड प्रेशर की रीडिंग 180/120 मिमी एचजी से अधिक हो जाती है जिसमें मरीज़ को खतरा ज़्यादा होता है। ऐसे में डॉक्टर को तुरंत संपर्क करना चाहिए।

अलग-अलग वक़्त में बीपी माप कर ब्ल्डप्रेशर की स्थिति का मूल्यांकन बेहतर तरीके से किया जा सकता है। इसे चेक कराने का कोई आदर्श समय नहीं है, क्योंकि समय और शारीरिक गतिविधियों के मुताबिक़ बीपी बढ़ता घटता रहता है। ज़रूरी ये है कि बीपी कैसे मापा जाए।

अपको बता दें कि हमारा बीपी सुबह सब से कम होता है वहीं दिन में 30 फ़ीसद तक इसका स्तर बदलता रहता है। हार्मोनल चेंजेस, शारीरिक गतिविधि और खान-पान की वजह से आता ये बदलाव आता है। इसलिए दिन में दो दफा बीपी नोट करना चाहिए।

 

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Saddiya Anwar

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