मां-बाप से रूठ जाने पर भी इनकी आखें नम होती हैं और उनके रूठ जाने पर भी ये आंसू बहाती हैं, तभी तो ये छोटे से दिल वाली बेटियां अपने मां-बाप को हमेशा याद आती हैं। मां की दोस्त और बाप की दुलारी बेटियों की ज़िंदगी में कितने भी उतार चढ़ाव आ जाएं लेकिन वो अपने घर में किसी भी तकलीफ़ का पता नहीं होने देती। वहीं मां अपनी परेशान बेटी के चेहरे को देखते ही सारी कहानी जान लेती है और कुछ छोटी-छोटी खुशियों और संबंध को एक दिवस के रूप में मनाने के लिए आज के दिन को बेटियों का दिन कहा गया है। इन्हीं कुछ छोटी-छोटी खुशियों और संबंध को एक दिवस के रूप में मनाने के लिए आज के दिन को बेटियों का दिन कहा गया है।
यह दिन किस तरह बेटियों के लिए खास होता है, जानिए
आज यानी 27 सितंबर को बेटी दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन बेटियों के लिए बेहद ख़ास होता है। उन्हें इस खास दिन पर घर में खास तरह के व्यवहार से खुश करने की कोशिश की जा रही है। जिससे कि वे जज़्बाती और भावनात्मक रूप से मजबूत रह सकें और ज़िंदगी में आने वाली किसी भी चुनौतियों में खुद को अकेला ना समझें। हर मुश्किल में उन्हें याद रह सके कि वह अपने मां-बाप की बेटी हैं और वह कहीं भी कभी भी अकेली नहीं। उनके ये दो साय उनके साथ हर कदम हैं चाहे कोई भी मुश्किल, परेशानी और परीक्षा सामने आ जाते हैं।
घर को संवारती, देश का नाम रौशन करती, मां-बाप की सेवा के लिए हर दम तैयार रहती बेटियों को समर्पित 27 सितंबर के दिन को वर्ल्ड डॉटर्स डे के रूप में मनाया जाता है।
जानिए इस दिन का महत्व
दरअसल भारत में बेटियों को लेकर एक खास रूढ़िवादी सोच रही है। बड़े शहरों में इस सोच में काफी बदलाव आया है लेकिन ऐसे कई छोटे शहर हैं जहां अभी भी बेटियों को खास तवज्जो नहीं दिया जाता। इसी रूढ़िवादी सोच को समाज से दूर करने हेतु देश में डॉटर्स डे मनाया जाने लगा। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों के मन से यह भ्रम कि बेटियां बोझ होती हैं, दूर करने की कोशिश होती है। इस दिन के माध्यम से लोगों को याद करने का अवसर मिलता है कि उनकी बेटियां उनके लिए कितनी अनमोल होती हैं।
कप्लना चावला, सानिया मिर्ज़ा, हाल ही में नेवी मिशन में जुड़ने वालीं दो महिलाएं, किरण बेदी, सानिया नेहवाल, लता मंगेशकर, मालिनी अवस्थी, मिताली राज, गुंजन सक्सेना जैसे अनगिनत नाम हैं जिन्होंने हमारे देश का नाम गर्व से ऊंचा किया है और बाकी महिला वर्ग को निडर हो कर जीने की प्रेरणा देती हैं। आज का ये दिन उन साहसी, शौर्य और प्राकर्मी बेटियों को समर्पित है।
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