आजकल गलत आदतों और असंतुलित खानपान की वजह से हम कई प्रकार की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इन समस्याओं में एक कोलेस्ट्रॉल भी है। यह दो प्रकार का होता है एक गुड कोलेस्ट्रॉल और एक बैड कोलेस्ट्रॉल। बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हम ह्रदय संबंधी बीमारियों का सामना करने लगते हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण नसों में गाढ़ा और चिपचिपा पदार्थ जमा होने लगता है।
जब नसों में इसकी मात्रा बढ़ जाती है तो यह रक्त वाहिकाओं को बंद कर देता है जिससे खून पर्याप्त मात्रा में नहीं बहता। इस वजह से लोग दिल से जुड़ी बीमारियों के शिकार तेजी से होते हैं। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए अनहेल्दी फैट वाले फूड जैसे- मक्खन, घी, मीट, डेयरी प्रॉडक्ट, आइसक्रीम, नारियल तेल का सेवन करने से बचें।
आप घर पर अपनी डाइट में बदलाव कर इस बैड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। कुछ चटनियों को आप अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। इनके सेवन से बैड कोलेस्ट्रॉल फिल्टर हो जाता है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानते हैं।
धनिया की चटनी
धनिया में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक होती है और जब इसे हृदय-स्वस्थ आहार में शामिल किया जाता है, तो यह रक्तचाप और बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करके और एचडीएल (अच्छा) कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर आपके हृदय की रक्षा कर सकता है। आप अपनी डाइट में धनिया की चटनी शामिल कर सकते हैं।
लहसुन की चटनी
कई अध्ययनों से पता चलता है कि हर दिन लहसुन की एक कली या 3-6 ग्राम खाने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर 10 फीसदी तक कम हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि लहसुन में एलिसिन होता है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने से जुड़ा है।
टमाटर की चटनी
टमाटर में लाइकोपीन की मात्रा अधिक होती है, यह एक ऐसा रसायन है जो लिपिड के स्तर को बेहतर बना सकता है और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम कर सकता है। इसके अलावा, शोध से पता चलता है कि टमाटर का जूस पीने से उनमें लाइकोपीन की मात्रा बढ़ जाती है। टमाटर के जूस में फाइबर और नियासिन भी अधिक होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
फाइबर की मात्रा बढ़ाए
आपको अपनी डाइट में फाइबर को बढ़ाने वाली चीजों को शामिल करना चाहिए। साबुत अनाज, अलसी के बीज, पिस्ता और बादाम आदि चीजों को खाना चाहिए। फाइबर से ज्यादा देर तक पेट भरा रहता है इससे वजन कम करने में मदद मिलती है।
नोट- दी गई जानकारी सामान्य उद्देश्य के लिए है। इसे किसी पेशेवर की तरह नहीं लेना चाहिए। ऐसी समस्या आने पर पेशेवर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।