हितेश पंत (नई दिल्ली)
आज जगह-जगह आपको तंबाकू के खिलाफ अभियान नजर आ रहा होगा। सरकारी संस्थाएं हों या निजी संगठन हर कोई तंबाकू से होने वाले खतरों के बारे में बड़े-बड़े व्याख्यान दे रहे होंगे। साथ ही तंबाकू से दूर रहने की सलाह भी दी जा रही है। दरअसल आज पूरी दुनिया विश्व तंबाकू निषेध दिवस मना रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वर्ष तंबाकू और ह्रदय संबंधी रोग की थीम पर ये आयोजन कर रहा है।
तंबाकू और इससे निर्मित उत्पाद से होने वाली बीमारियां और उनके बचाव के लिए हर वर्ष विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है। तंबाकू अनेक बीमारियों की वजह बनता है। किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन अपनी जिदंगी को मौत के मुंह में धकेलना जैसा है। मीडिया रिपोर्ट से अनुसार देश में हर रोज 2739 लोग तंबाकू उत्पादों के कारण हुए कैंसर से दम तोड़ देते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार ग्लोबल वयस्क तंबाकू सर्वे 2016-17 में ये बात सामने आयी कि देश में करीब 42.2 फीसदी पुरुष और 14.2 महिलाएं तंबाकू से निर्मित उत्पादों का सेवन करते हैं। इसी सर्वे के अनुसार देश में करीब 19 फीसदी पुरुष और 2 फीसदी महिलाएं धूम्रपान करती हैं। वहीं 29.6 फीसदी पुरुष और 12.8 फीसदी महिलाएं धुंआ रहित तंबाकू का सेवन करते हैं।
ध्रूमपान से दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। इसके साथ ही धूंआ रहित तंबाकू के सेवन से दिल के दौरे की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। दुनिया में होने ह्रदय संबंधी बीमारियों से होने वाली मौतों से बचने का सबसे कारगर उपाय तंबाकू पर रोकथाम है। दिल की बीमारियों की का 10 फीसदी कारण तंबाकू का सेवन है।
तंबाकू के खतरों से बचने के लिए इच्छा शक्ति सबसे जरूरी है। अगर दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ तंबाकू छोड़ने का प्रण किया जाए तो ये जरूर मुमकिन है। ध्रूमपान छोड़ने का फायदा कुछ घंटों में ही होने लगता है। तुरंत शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ने लगती है। इसके साथ ही ध्रूमपान छोड़ने के एक साल के बाद ही दिल की बीमारियों का खतरा 50 फीसदी तक कम हो जाता है।