प्रदूषण को कैसे रोकता है ये अद्भुद स्मॉग टॉवर, जानिए पूरी जानकारी

स्मॉग टॉवर

वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर फ़ैला हुआ है। डब्लूएचओ के नए डेटा के अनुसार दुनिया में 10 में से 9 लोग उच्च स्तर के प्रदूषकों से युक्त हवा में सांस ले रहे हैं। वायु प्रदूषण की समस्या पूरे विश्व में फैलती जा रही है। चीन के कई शहरों में हालात बिल्कुल बेहाल हैं। अब चीन ने इस दिशा में काम करते हुए स्मॉग टॉवर भी लगा दिए हैं ताकि लोगों को स्वस्थ हवा दी जा सके।

भारत भी इसी तरह की पहल को अपनाने जा रहा है। बता दें कि, दिल्ली की एक कंपनी ‘कुरिन सिस्टम्स’ को दुनिया के सबसे बड़े वायु शोधक का पेटेंट मिला है। यह कंपनी दिल्ली में कुछ IIT की सहायता से स्मोग टॉवर लगाने की योजना बना रही है।

स्मॉग टॉवर

जानिए इस एयर प्योरीफायर की विशेषताएं

यह टॉवर एक चिमनी के आकार की संरचना है जो कि रेडीमेड कंक्रीट से भी बनायी जा सकती है। दिल्ली में लगाये जाने वाले स्मॉग टॉवर का आकार 40 फीट लम्बा और 20 फीट गोलाई वाला होगा।  यह एक तरह से एयर प्यूरीफायर का काम करता है। यह डिवाइस सभी 360-डिग्री कोणों से हवा को सोख सकता है और एक घंटे में लगभग 13 लाख क्यूबिक मीटर स्वच्छ हवा उत्पन्न करने में सक्षम होगा। हालांकि, इसकी क्षमता प्रतिदिन 32 मिलियन क्यूबिक मीटर हवा को साफ करने की क्षमता होगी.

इस विशाल एयर प्यूरीफायर को, स्वच्छ हवा के प्रवाह को बनाए रखने के लिए 48 पंखों की जरूरत होगी। इस उपकरण के निर्माता का दावा है कि यह प्यूरीफायर 3 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले 75,000 लोगों को स्वच्छ हवा प्रदान कर सकता है।

कैसे काम करता है

यह टॉवर अपने आस-पास की प्रदूषित हवा को सोख लेता है और फिर इसमें लगे कई फिल्टरों द्वारा इसे साफ़ करके दुबारा पर्यावरण में छोड़ देता है। एक एयर प्यूरीफायर जितना बड़ा होगा, उतनी ही ज्यादा हवा को साफ करेगा। इनको बिजली और सोलर पॉवर से भी चलाया जा सकता है।

हवा को शुद्ध करने के लिए इसमें, अत्यधिक प्रभावशाली H14 ग्रेड हाईली इफेक्टिव पार्टिकुलेट अरेस्ट (HEPA) फिल्टर का उपयोग किया जाएगा। यह फिल्टर, हवा में मौजूद 99.99% पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) को साफ कर सकता है।

यह पीएम 2.5, पीएम 10 जैसे हानिकारक कणों से हवा को शुद्ध करता है, जो कि प्रदूषण के मुख्य कारक माने जाते हैं। हालाकि, इसके पहले दिल्ली में ITO के पास लगाया गया एयर प्यूरीफायर ‘वायु’ सफल नहीं हो सका था क्योंकि इसके फ़िल्टर 4-5 दिन में ख़त्म हो जाते थे और ज्यादा हवा को साफ़ भी नहीं कर पा रहे थे।

प्रदूषण से दिल्ली और अन्य शहरों की हालत को देखते हुए देश के नागरिकों को स्वच्छ हवा प्रदान करने के लिए यह एक अच्छा कदम माना जा सकता है।

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Saddiya Anwar

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