वर्तमान समय में संचार के बढ़ते संसाधनों के बीच अकेलापन आधुनिक जीवन की त्रासदी बनते जा रही है। यह न केवल भारत की समस्या है बल्कि दुनिया भी इसे तरह से पीड़ित है। समस्या इतनी बड़ी है कि इससे निपटने के लिए ब्रिटिश सरकार ने तो बकायदा एक मंत्रालय ही गठित कर लिया है।
आज की रिश्ते अकेलेपन की राह पर चल पड़े हैं, यह बहुत हद तक सच साबित होता दिख रहा है। आज ऐसे सैकड़ों पूंजीपति परिवार है जो अपने माता पिता को वृद्ध आश्रम में छोड़ आते हैं। अब जिस मां-बाप ने अपने बच्चे को पढ़ाई लिखाई, रोजगार और नौकरी के लिए दिन रात एक कर के उन्हें सफलता पर पहुंचाया। जब अब मां-बाप को उनकी जरूरत है। तो अपनी पत्नी और बच्चों को लेकर अलग होते जा रहे हैं। इस तरह के अकेलेपन रिश्ते को दागदार कर रहे हैं। शादी हुई नहीं की पत्नी बोलती है मां बाप से अलग रहेंगे। उसे इस बात को भी समझना चाहिए कि उसके भी बच्चे कल इसी बात को दोहराएंगे तो उस पर क्या बीतेगी। आज के समय मैं अकेलापन जीवन का सबसे बड़ा अभिशाप है और दुर्भाग्यवश ऐसे भी सब लोगों की संख्या में दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी होती जा रही है। इसमें जीवन के हर जाति आयु वर्ग के स्त्री, पुरुष शामिल है।
अकेलेपन की त्रासदी भोगने वाले इस समूह में भी लोग हैं जो किसी कारण बस अकेले रहने को मजबूर है। बल्कि यह लोग भी हैं जो परिवार के साथ रहते हुए कार्यस्थल पर भरे पूरे माहौल एवं भीड़ के बीच भी खुद को अलग-थलग और अकेला महसूस करते हैं। अपने को बेहद तन्हा पाते हैं।वही आजकल महानगरों में एकल परिवार में रहने वाले बच्चे खुद को बहुत अकेला महसूस करते हैं। रिश्ते को अकेलापन से दूर होने के कारण सफलता आदमी को अपने करीबियों से दूर लेते जा रहे हैं। पहले संगीत परिवारों में वह सीखने को मिलता था कि लड़कर भी साथ में कैसे रह सकते हैं लेकिन अब संयुक्त परिवार खत्म होते जा रहे हैं जिसके चलते लोगों के बीच दूरियां बढ़ते जा रहे हैं और लोग अकेले में रहने के आदी होते जा रहे हैं पहले आदमी को देखकर दूसरा आदमी मुंह नहीं पहले तथा बल्कि उसके पास पहुंच कर उसके हाल-चाल पूछ लेता था आज आदमी बस अपने परिवार तक सीमित रह गया है और जब परिवार भी उसकी भावनाएं नहीं समझ पाता है तो वह अकेला रह जाता है। इन्हीं वजहों के कारण अब रिश्ते अकेलेपन की राह पर चल पड़े हैं।
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