आपने धार्मिक स्थानों पर या पूजा-पाठ वाली जगह पर कई तरह के साधनों को देखा होगा। कई मेलों पर आपने नागा साधुओं को भी देखा होगा। आपने उनके बारे में कई तरह की अचंभित करने वाली जानकारियां सुनी होंगी। मगर आप संतुष्ट नहीं हुए होंगे। आज हम आपको नागा साधुओं की कुछ ऐसी शक्तियों के बारे में बताएंगे। जिसे जानकर आप बिल्कुल से चौक जाएंगे। अगर आपको लगता है कि नागा साधु बनना आसान होता है तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम आपको बता दें कि नागा साधुओं की ट्रेनिंग सेना के कमांडो ट्रेनिंग से भी ज्यादा कठिन होती है। नागा साधु बनने से पहले ही लोग अपना पिंड दान और श्राद्ध कर दिया करते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि नागा साधुओं को मठों और मंदिरों की रक्षा के लिए तैयार किया जाता था। इतना ही नहीं इतिहास में ऐसी कई घटनाएं दर्ज हैं जब नागा साधुओं ने मठ और मंदिरों की रक्षा के लिए कई युद्ध तक लड़े हैं। नागा साधुओं की दीक्षा के अलग नियम होते हैं।
नागा साधु बनने से पहले सबसे पहले लोगों की वासना की इच्छा को त्याग करना पड़ता है। इसके लिए उन्हें परखा जाता है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि व्यक्ति काम मोह लिप्त तो नहीं है। किसी को अचानक ही नागा साधु बनने की दीक्षा ऐसे ही नहीं शुरू कर दी जाती।
नागा साधु बनने के लिए हृदय में सेवा भाव का होना बहुत आवश्यक है। ऐसा माना जाता है कि जो भी नागा साधु बन रहा है वह समाज और राष्ट्र कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहेगा। कई बार तो नागा साधुओं को अपने गुरु के प्रति अपार प्रेम और समर्पण दिखाना पड़ता है। इसके अलावा नागा साधुओं को अपना पिंड दान और शाद स्वयं करना पड़ता है। वह समाज के लिए मृत हो जाते हैं। इसके बाद ही उन्हें गुरु की तरफ से नया नाम और पहचान दी जाती है।
इसके अलावा नागा साधुओं को अपने शरीर पर एक से ज्यादा वस्त्र धारण करने की अनुमति नहीं होती। वह केवल अपने शरीर पर एक वस्त्र धारण कर सकते हैं। वह भी गेरुआ रंग का। इसके साथ ही उन्हें भस्म के साथ श्रृंगार की अनुमति होती है। वह अपने शरीर पर चिता की ताजा भस्म लगाया करते हैं।

