भले ही हम डिजिटल युग में हों लेकिन बना हुआ है परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व : निशि सिंह

परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व

नई दिल्ली : मंगलवार को दिल्ली के झरौदा में समर्पण व पंचायत खबर के तत्वाधान में परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व देते हुए एक सार्वजनिक लाईब्रेरी की शुरूआत की गई। इस लाईब्रेरी का उद्घाटन जानी—मानी सामाजिक कार्यकर्ता, कवयित्री, गायिका व नाद फाउंडेशन के जरिए समाज के सभी वर्गों की सेवा को तत्पर रहने वाली नेत्री निशी सिंह ने किया। निशी सिंह दिल्ली पुलिस के ज्वाईंट सीपी आलोक कुमार की पत्नी हैं।

इस मौके पर निशि सिंह ने कहा कि लाईब्रेरी का हर ​व्यक्ति के जीवन में काफी महत्व है। भले ही आज हम डिजिटल युग में रह रहे हों, मोबाईल और कंप्यूटर के जरिए हमें पुस्तकें पढ़ने को मिल जाती हैं, बावजूद इसके परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व कम नहीं हुआ है। हम जब लाईब्रेरी में बैठकर अलग—अलग साहित्य व विभिन्न भाषा, समाज,संस्कृति की किताबों से गुजरते हैं तो हमारा बौद्धिक विकास होता है और हम एक बेहतर व सजग नागरिक के रूप में अपने दायित्व का निर्वहण कर पाते हैं।

परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व : निशि सिंह

उन्होंने लाईब्रेरी में बड़ी संख्या में उपस्थित बालिकाओं व महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा हम महिलाओं के लिए घर के काम के साथ ही अपनी पढ़ाई को भी लगातार जारी रखना चाहिए। क्योंकि यही एक जरिया जिसके जरिये न सिर्फ हम अपना व्यक्तित्व संवारेते हैं बल्कि पूरे परिवार और देश को आगे ले जाने में महत्ती भूमिका निभाते हैं। इस क्रम में उन्होंने अपना अनुभव भी साझा किया और कहा कि जब बच्चे बड़े हो गये तो अब मैं समाज की सेवा के लिए निकली हूं लेकिन जब वे छोटे थे तो हमारी प्राथमिकता उनकी देखभाल थी।

परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व

इस मौके समर्पण की अध्यक्षा शैल को लाईब्रेरी के संचालन के लिए प्रोत्साहित करते हुए निशि सिंह ने कहा कि मुझे यह देख कर काफी प्रसन्नता हो रही है कि आपने उस ईलाके में लाईब्रेरी की शुरूआत किया जहां के बच्चों को इसकी जरूरत थी। सबसे बड़ी बात है कि इस लाईब्रेरी में साहित्य की पुस्तकें तो हैं ही साथ ही साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें भी बड़ी संख्या में हैं जिससे प्रतियोगी छात्र विशेष रूप से लड़कियां काफी लाभान्वित होंगी। परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व के साथ निशी सिंह ने संस्था की अध्यक्षा को भविष्य में लाईब्रेरी के संचालन में हर तरह का सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व

उल्लेखनीय है कि समर्पण व पंचायत खबर हाशिए पर रह रहे समाज विशेष रूप से बालिकाओं के उत्थान के लिए सतत रूप से कार्य कर रहा है। संस्था की गतिविधियों की जानकारी देते हुए अध्यक्षा शैल ने कहा कि आज हमने बिटिया कल्ब की भी शुरूआत की है। इस क्लब के जरिए हम उन परिवारों और उन बेटियों से जुड़ेगे जिनके परिवार में ​सिर्फ और सिर्फ लड़कियां है। जल्द ही इस क्लब की रूपरेखा विस्तार से रखा जाएगा। अध्यक्षा ने निशि सिंह को लाईब्रेरी का उद्घाटन करने के लिए आभार जताया।

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भले ही हम डिजिटल युग में हों लेकिन बना हुआ है परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व : निशि सिंह
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भले ही हम डिजिटल युग में हों लेकिन बना हुआ है परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व : निशि सिंह
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भले ही आज हम डिजिटल युग में रह रहे हों, मोबाईल और कंप्यूटर के जरिए हमें पुस्तकें पढ़ने को मिल जाती हैं, बावजूद इसके परंपरागत लाईब्रेरी का महत्व कम नहीं हुआ है।
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