अगर हम ये कहे कि आधुनिक समय में बच्चो के बीच कम्पीटिशन इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि हर कोई एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहा है तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा। ऐसे में अपने बच्चे का प्रोत्साहन बढ़ाने के लिए आपको एक बात का खास ख्याल रखना चाहिए। वह ये कि भूल कर भी अपने बच्चे की तुलना किसी दूसरे बच्चे के साथ न करे। बता दे कि ऐसा करने से आपके बच्चे के मन पर गलत असर पड़ सकता है। भले ही विषय कोई भी क्यों न हो, लेकिन कभी भी अपने बच्चे को कम न समझे। फिर भले ही वो रंग रूप की बात हो, पर्सनलटी की बात हो या फिर पढ़ाई और व्यव्हार की बात हो। आपको हर चीज में अपने बच्चे का पूरा साथ देना चाहिए।
अपने बच्चे की तुलना..
बहरहाल अगर आप खुद अपने बच्चे के सहायक बनेगे तो इससे बच्चे के मन में भी कभी हीन भावना पैदा नहीं होगी। वही दूसरी तरफ अगर आप अपने बच्चे के सामने किसी दूसरे बच्चे की तारीफ ही करते रहेंगे तो इससे आपका बच्चा आपसे दूर भी जा सकता है। गौरतलब है कि बच्चो का मन काफी नाजुक होता है। शायद यही वजह है कि वो हर छोटी से छोटी बात को अपने मन में बिठा लेते है।
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जैसे कि अगर आपके बच्चे के कभी कम मार्क्स आएं तो आपको उसे आगे से ज्यादा मार्क्स लाने के लिए बेहतर पढ़ाई करने की प्रेरणा देनी चाहिए। न कि उसे ये कह कर ताना देना चाहिए कि दूसरे बच्चो के कितने अच्छे मार्क्स आएं है, फिर तुम्हारे क्यों नहीं। बता दे कि अगर आप ऐसा करेंगे तो इससे आपका बच्चे का मन पढ़ाई से हट भी सकता है। यहाँ तक कि खेल कूद के दौरान भी अपने बच्चो को अच्छी बातें सीखाएं, क्यूकि हर बच्चे की समझ और ताकत अलग अलग होती है। इसलिए कभी भी अपने बच्चे की तुलना किसी दूसरे से करने की गलती न करे।


