आज चाँद की आखरी ऑर्बिट में इसरो का Chandrayaan-2 प्रवेश कर लिया है| चन्द्रमा की इस ऑर्बिट को Manoeuvre ऑर्बिट कहा जाता है| इस पांचवीं और आखिरी कक्षा में प्रवेश करने का निर्धारित समय आज शाम के 6:27 बजे का था। चंद्रयान- 2 पर ISRO ही नहीं, NASA समेत दुनिया भर के स्पेस एजेंसियों की पैनी नजर बनी हुई है। NASA के पूर्व एस्ट्रॉनॉट Donald A. Thomas ने कहा कि भारत के इस महत्वाकांक्षी लूनर मिशन के तहत चंद्रयान- 2 के चांद की सतह पर होने वाली लैंडिंग पर NASA पैनी नजर बनाए हुए है। चंद्रयान- 2 आज से 6 दिन बाद 7 सितंबर को चांद की सतह पर लैंड करेगा।
चाँद की आखरी ऑर्बिट को पर किया Chandrayaan-2
चंद्रयान के ऑर्बिट पार करने की जानकारी इसरो ने ट्वीट कर दी है| बात दे Manoeuvre ऑर्बिट को पार करने की अवधि 52 सेकंड की थी| साथ ही पार किये गए ऑर्बिट 119 किमी x 127 किमी की है। यह भी बताया है की यान के सरे पैरामीटर सामान्य है| अब इसरो का अगला ऑपरेशन चंद्रयान -2 ऑर्बिटर से विक्रम लैंडर को अलग करना है, जो 02 सितंबर, 2019 को 12:45 – 13:45 बजे (IST) के बीच निर्धारित किया गया है। इसके बाद, चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र में इसकी लैंडिंग के लिए तैयार करने के लिए विक्रम लैंडर के दो deorbit Manoeuvre होंगे।
आपको बता दे की चंद्रयान- 2 पहला ऐसा स्पेसक्राफ्ट बनेगा जो चांद के दक्षिणी ध्रुव (Pole) पर लैंड करेगा। ये वही हिस्सा है जहां पांच साल बाद NASA के अंतरिक्ष यात्री लैंड करने वाले हैं। NASA ही नहीं दुनिया भर की निगाहें Chandrayaan-2 की लैंडिंग पर बनी रहेगी। डोनल्ड ए थोमस ने कहा कि चांद और यूनिवर्स के बारे में जानने के लिए सभी उत्सुक हैं।
#ISRO
The final and fifth Lunar bound orbit maneuver for Chandrayaan-2 spacecraft was performed successfully today (September 01, 2019) at 1821 hrs IST.For details please visit https://t.co/0gic3srJx3 pic.twitter.com/0Mlk4tbB3G
— ISRO (@isro) September 1, 2019
चन्द्रमा का दक्षिणी ध्रुव काफी महत्वपूर्ण है
Donald A. Thomas तमिलनाडू के कोयम्बटूर स्थित पार्क कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में रिपोर्टर्स से बात करते हुए कहा कि हमने चांद के मध्य में पहले लैंड कर चुके हैं, लेकिन ऐसा चांद की दक्षिणी सतह पर अभी तक हमने लैंड नहीं किया है। चन्द्रमा का दक्षिणी ध्रुव काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमें लगता है कि वहां बर्फ मिलने की संभावना है। अगर बर्फ मिलता है तो वहां पानी मिलने की भी संभावना बन सकती है। हमें वहां पानी मिलता है तो हम उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ सकते हैं।
Chandrayaan-2 भारत के लिए पहला लूनर मिशन है जिसमें चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस मिशन के पूरा होते ही भारत दुनिया के उन चार देशों में शामिल हो जाएगा, जिसने चांद की सतह पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की हो। भारत के अलावा अमेरिका, रूस और चीन ने चांद की सतह पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग कराई है।


