17 नवम्बर को होगा ऐतिहासिक फ़ैसला –  होंगे राम या होगी मस्जिद ।

फ़ैसला रामलला विराजमान के पक्ष में आया है। 

फ़ैसला जल्द –  होंगे राम या होगी मस्जिद  

आगामी 17 नवम्बर को देश का ऐतिहासिक फ़ैसला आने वाला है। ‘ राम जन्म भूमि एवं बाबरी मस्जिद‘ का मुद्दा दशकों पुराना है। 40 दिनों तक चले इस सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय अपना फ़ैसला सुनाएगा। 

 

क्या है मामला 

इस मुद्दे में दो पक्ष मुख्य रूप से आमने सामने हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने उसी स्थान में जन्म लिया था इस्लिये वह स्थान स्वतंत्र रूप से हिन्दू पक्ष को बिना किसी हस्तक्षेप के प्रदान किया जाए। वहीं मुस्लिम पक्ष का मानना है की यहाँ सदियों पहले मुग़ल सम्राट बाबर ने मस्जिद का निर्माण कराया था जिसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता है। तथा उस स्थान पर अपना एकाधिकार चाहता है। 

वक्त की माँग 

भारत के सम्विधान के अनुसार भारत एक पंथ निरपेक्ष देश है। निश्चित रूप से सभी धर्मों को स्वतंत्रता है। और सभी धर्मों के मूल में एक ही बात निहित है वह है ‘मानवीय’ मूल्यों के साथ जीवन जीना। यही संदेश भगवान राम ने भी दिया और इस्लाम धर्म के पैगम्बर साहब ने भी। लेकिन अब हमने इनके जीवन सन्देशों को विकृत रूप में अपना कर समय और ऊर्जा दोनों नष्ट कर रहे हैं। अब तक कितने मामले न्यायालयों में लम्बित हैं। लेकिन हमने उस लड़ाई में समय नष्ट करना उचित समझा जिसका कोई औचित्य नहीँ बनता। अगर भगवान राम को इसका अंदेशा होता  तो मेरा पूर्ण विश्वास है की वो जन्म ना लेना अधिक उचित समझते। 

जिस देश में लाखों लोग न्याय की माँग मे जीवन काट देते हैं वहाँ 40 दिन की सुनवाई कहाँ तक उचित है ? महत्वपूर्ण यह नहीँ है की राम ने कहाँ जन्म था | लिया या मस्जिद कहाँ थी। महत्वपूर्ण यह है की उनके आदर्श हम कितना आत्म्सात कर पाए हैं। और उसके एकाधिकार के लिए किसी न्यायालय के फ़ैसले की आवश्यकता नहीँ है।

Manjula Tiwari

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

IND vs SA Head To Head in T20’S IPL 2022: STAT TRACKER