पीरियड्स को लेकर हमारे देश में तरह तरह की भ्रांतियां और अंधविश्वास फैला है। कई जगहों पर तो पीरियड्स के दिनों में महिलाओं के साथ असामान्य व्यवहार होता है। इसी तरह सैनेटरी पैड को लेकर भी ऐसी गोपनीयता बरती जाती है जैसे वो कोई जरुरत की चीज न होकर कहीं तबाही मचाने का या नशे का सामान हो। ऐसे में फिल्म डायरेक्टर आर बाल्की की हिम्मत काबिले तारीफ है, जिन्होंने सैनेटरी पैड जैसे अहम मुद्दे पर फिल्म बनायी। अक्षय कुमार और राधिका आप्टे की मुख्य भूमिका में बनी पैडमैन आज रिलीज हो गई। तमिलनाडु के अरुणाचलम मुरूगनांथम की जिंदगी में बनी ये फिल्म एक रीयल पैडमैन की कहानी है। इस फिल्म को देखने के बाद पीरियड्स को लेकर लोगों की सोच में बदलाव आने वाला है।
स्टोरी
फिल्म को मध्य प्रदेश की कहानी का रूप दिया गया है। यहां रहने वाले लक्ष्मीकांत चौहान (अक्षय कुमार) की गायत्री (राधिका आप्टे) से शादी होती है। दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते हैं। लक्ष्मीकांत को पता चलता है कि गायत्री पीरियड्स के दौरान गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती है। जिसकी वजह सैनेटरी नेपकिन की कीमतों का ज्यादा होना है। लक्ष्मी चाहता है कि पत्नी पैड यूज करे लेकिन गायत्री इसके लिए तैयार नहीं होती। लक्ष्मी को ये बात चुभ जाती है और वो सस्ते सैनेटरी पैड बनाने की तैयारी में जुट जाता है। कई प्रयास करने के बाद भी वो इसमें सफल नहीं हो पाता। इससे लक्ष्मी का परिवार उसके खिलाफ हो जाता है। पत्नी, मां, बहन के साथ साथ गांव के लोग भी उसे पागल समझने लगते हैं। लेकिन वो जो करने निकला है उससे पीछे नहीं हटता। वो लगातार पैड बनाने को लेकर नई नई जानकारियां जुटाता है। वो एक ऐसी मशीन तैयार करता है जिससे बेहद कम कीमत पर पैड बनाए जा सकते हैं। इसके लिए लक्ष्मी को आईआईटी से बेस्ट इनोवेटर का अवॉर्ड भी मिलता है।
लक्ष्मी का साथ देने के लिए सेकंड हाफ में एंट्री होती है परी (सोनम कपूर) की। लक्ष्मी के प्रयास से परी प्रभावित होती है और उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। गांव की औरतों को सैनेटरी परी पैड की विशेषताएं बताती हैं। इसके बाद लक्ष्मीकांत अपने मिशन पर कामयाब होता है। सस्ते सैनेटरी पैड को वो अपने गांव के साथ साथ बाहर भी भिजवाने लगता है। इस काम के लिए लक्ष्मी को यूनाइटेड नेशंस में बोलने का मौका मिलता है और वो अपनी बातों से सबका दिल जीत लेता है।
एक्टिंग
अरूणाचलम मुरूगनांथम की इस कहानी को अक्षय कुमार ने उसी संजीदगी से निभाया है जैसी उनसे अपेक्षा रहती है। बेहद अहम मुद्दे पर बनी फिल्म में अक्षय के अभियन की जितनी तारीफ की जाए कम है। अपने किरदार के हर पहलू को शानदार अभिनय से निभाया है। चाहे अकेला पड़ने के दौरान खुद पर पैड यूज करना हो या परिवार का साथ छूट जाने के बाद भी समाज की भलाई के लिए अपने मिशम में अडिग रहना हो। हर जगह अक्षय की एक्टिंग आपका दिल जीत लेगी। राधिका आप्टे (गायत्री) ने भी ग्रामीण पृष्ठ भूमि की महिला का रोल बखूबी निभाया है। सोनम कपूर की एंट्री कुछ देर से जरूर हुई पर उनकी एक्टिंग ने भी फिल्म को मजबूती दी है।
म्यूजिक-डायलॉग्स
फिल्म में अमित त्रिवेदी ने म्यूजिक दिया है। रोमांटिक गाना ‘आज से मेरी’ के साथ फिल्म की शुरूआत की गई है। जिसमें लक्ष्मीकांत और गायत्री का प्यार और शादी के सीन हैं। ‘साले अपने’ और ‘हुबहू’ जैसे गाने भी लोगों को पसंद आ रहे हैं। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि कौसर मुनीर ने अच्छे गाने फिल्म को दिये हैं। इसके अलावा कुछ डायलॉग्स ऐसे हैं जो पैड को हौवा बनाने वालों को अच्छा सबक सिखा सकते हैं।
ये फिल्म पीरियड्स और पैड को लेकर शर्म और अंधविश्वास को करारा जवाब है। फिल्म देखने के बाद आपकी सोच में बदलाव जरूर होगा। हो सके तो पूरे परिवार के साथ ये फिल्म देखने जाइए। आखिर मुद्दा स्वास्थ्य और गलतफहमियों से जो जुड़ा है।


