हितेश पंत (नई दिल्ली)
ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 का समापन रविवार को हो गया। अपने देश में हो रहे कॉमनवेल्थ खेल में प्रतिभाग करने वाले ऑस्ट्रेलियाई एथलीटों ने सबसे ज्यादा मैडल जीतकर अपने देश का नाम ऊंचा किया, वहीं भारतीय एथलीट्स ने भी कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना तीसरा बेहतरीन प्रदर्शन किया। अगले कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन इग्लैंड के बर्लिंघम में 2022 को होगें।
कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह की तरह ही समापन समारोह भी बहुत आकर्षक रहा। सभी देशों के एथलीट समारोह परेड का हिस्सा बने। भारतीय खिलाड़ियों का उत्साह भी कोई कम न दिखा। देश की धाकड़ मुक्केबाज मैरी कॉम ध्वजवाहक के रूप में सबसे आगे रहीं। उनके साथ भारतीय दल के सदस्य हाथों में तिरंगा लिए हर भारतीय को गर्व का एहसास करा रहे थे।
कॉमनवेल्थ के इतिहास में ये भारत का तीसरा बेहतरीन प्रदर्शन है। 21 वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत कुल 66 पदकों के साथ पदक तालिका में तीसरे स्थान पर रहा। भारतीय एथलीटों ने कुल 26 स्वर्ण, 20 सिल्वर और 20 कांस्य पदक जीते। यहां भारतीय पहलवानों का अपना अलग ही जलवा रहा। सभी 12 पहलवान इस बार पदक जीतने में कामयाब रहे। रेसलिंग में भारत ने 5 गोल्ड, 3 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज मैडल जीते।
कॉमनवेल्थ 2018 में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा पदक निशानेबाजों ने जीते। 7 गोल्ड, 4 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज मैडल के साथ निशानेबाजी में कुल 16 पदक जीते हैं। निशानेबाजों में 15 साल के अनीश भानवाला और 16 साल की मनु भाकर ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत की युवा क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके साथ बॉक्सिंग में भारतीय एथलीटों ने कुल 9 पदक अपने नाम किए।
कॉमनवेल्थ में भारत का अब तक सबसे शानदार प्रदर्शन 2010 में रहा। दिल्ली में आयोजित इन गेम्स में भारत ने 38 स्वर्ण पदक के सात कुल 101 पदक जीते थे। भारतीय एथलीटों का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2002 में रहा है, जब भारत ने 30 स्वर्ण पदकों के साथ कुल 69 पदक अपने नाम किए।