जी- 20 शिखर सम्मेलन का 14 वा बैठक 28 व 29 जून को ओसाका, जापान में सम्पन्न होगा। भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इस सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि के रूप में शामिल होने के लिए रवाना हो चुके हैं। जापान जी-7 में शामिल था, लेकिन शिखर सम्मेलन की मेजबानी पहली बार करेगा। सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे व महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होगी।
क्या है G-20
1999 में ऐसिया में आए वित्तीय संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय औद्दोगिक व वित्तीय व्यवस्थाओं पर सदस्यों के सहयोग हेतु इसकी शुरुआत की गई। प्रारंभ में ये G-7 था जिसमें विश्व के 7 प्रमुख औद्दोगिक देश कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, रूस, संयुक्त राज्य शामिल थे। आगे विकासशील अर्थ व्यवस्था को देखते हुए अंतर राष्ट्रीय औद्दोगिक व वित्तीय संबंधी उद्देश्यों और योजनाओं को मद्देनज़र रखते हुए G-20 किया गया जिसमें अन्य विकास शील अर्थ व्यवस्थाओं को भी शामिल किया गया।
कौन होते हैं प्रतिनिधि
यह 20 देशों के वित्त मंत्री व केन्द्रीय बैंक गवर्नरों का संगठन है। जिनके साथ अंतर राष्ट्रीय श्रम संगठन, अंतर राष्ट्रीय मुद्रा कोश, आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन तथा विश्व बैंक मिलकर काम करते हैं। ये वित्तीय व्यवस्थाओं के नियमन व भविष्य में वित्तीय संकटों से निपटने के लिए एक साथ मंच पर आते हैं। जी-20 के सदस्य देश मिलकर विश्व के जीडीपी के 85 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। वैश्विक व्यापार में इनकी 80 प्रतिशत भागीदारी है।
कौन से देश हैं शामिल
19 देश व यूरोपीय संघ इसके सदस्य हैं। इन 19 देशों मेंआस्ट्रेलिया, अर्जेन्तिना, ब्राज़ील,चीन,फ्रांस,जर्मनी,इन्दोनेसिया,रूस, मेक्सिको,साउदी अरब, कैनडा,इटली,भारत,दक्षिण अफ्रिका,जापान,संयुक्त राष्ट्र,यूनाइटेड किंग्डम,तुर्की, दक्षिण कोरिया शामिल हैं।
प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले शिखर सम्मेलन में सदस्यों के अलावा कुछ देशों को मेहमान के रूप में भी आमंत्रित किया जाता है। इसके साथ ही कुछ देश अस्थाई सदस्य भी हैं। नीदरलैंड,स्पेन,थाईलैंड,चिली,सिंगापुर,वियतनाम व मिस्र इनमें शामिल हैं।
