हितेश पंत (नई दिल्ली)
दुनिया की सबसे दुर्गम और कठिन यात्राओं में से एक कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए पंजीकरण शुरु हो गए हैं। सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों के कारण हर साल सैकड़ों यात्री इसका हिस्सा बनते हैं। विदेश मंत्रालय ने 20 फरवरी से यात्रा के लिए पंजीकरण शुरु किया है जो 23 मार्च तक चलेगा। यात्रा की शुरुआत 8 जून से होगी।
कैलाश मानसरोवर हिमालय के केंद्र में है। मान्यता है कि इस पवित्र स्थान पर भगवान शिव साक्षात विराजते है। कैलाश पर्वत समुद्र तट से 22068 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। ये पर्वत तिब्बत में पड़ने वाले हिमायल के उत्तरी क्षेत्र में है। तिब्बत चीन के हिस्से पर अपना अधिकार मानता है इसलिए ये पर्वत चीन की सीमा में आता है।
प्रकृति और श्रद्धा के रोमांच से भरी यात्रा विदेश मंत्रायल द्वारा हर साल जून से सितंबर के बीच आयोजित होती है। मानसरोवर यात्रा उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा और सिक्किम के नाथुला दर्रे से होती है। पिछले साल चीन से डोकलाम विवाद के चलते नाथूला दर्रे से यात्रा की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन इस बार चीन ने आश्वस्त किया है कि यात्री नाथूला दर्रे का उपयोग कर सकेंगे।
विदेश मंत्रायल के मुताबित यात्रा की शुरूआत 8 जून से होगी। 1 जनवरी 2018 को जिनकी उम्र 18 से 70 साल के बीच होगी वो इस यात्रा के लिए पंजीकरण करा सकता है। इस बार कुल 1580 लोगों को यात्रा पर जाने की अनुमति दी जाएगी। जिनमें से 60 यात्रियों के 18 दल लिपुलेख दर्रे से यात्रा पर जाएंगे। इस मार्ग से यात्रिओं को पैदल जाना होगा और करीब 1 लाख 60 हजार का खर्चा होगा। जबकि नाथूला दर्रे से 50 यात्रियों के 10 दल भेजे जाएंगे। इस मार्ग से यात्रा का अधिकतर हिस्सा वाहन से तय होता है। जिसमें 2 लाख का खर्च होगा।
ह्रदय और सांस के रोगी इस यात्रा में शामिल नहीं हो सकते। यात्रा पर जाने पहले सरकार द्वारा यात्रियों का दिल्ली में पूरा मेडिकल चैकअप कराया जाता है। रिपॉर्ट पॉजिटिव आने पर ही यात्रा पर जाने की अनुमति दी जाती है। यात्रा के लिए अप्लाई करने के बाद सरकार द्वारा यात्रियों को चुनने के लिए कम्प्यूटर बेस्ड लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।



