अगर हम बदलते मौसम की बात करे तो जिस तरह से कई फलों का सीजन होता है, ठीक उसी तरह से कई जीव जंतुओं का भी अपना अलग सीजन होता है। जैसे कि आम का फल आमतौर पर गर्मियों के मौसम में ही आता है। ठीक वैसे ही मक्खी, मच्छर और छिपकलियाँ आदि भी ऐसे कई प्राणी है, जो गर्मियों के मौसम में ही हमें परेशान करते है। मगर क्या आप जानते है कि आखिर सर्दियों में कहाँ छिपती छिपकलियां और इस मौसम में ये नजर क्यों नहीं आती। बहरहाल आज हम आपको इसी से संबंधित कुछ खास बातें बताना चाहते है।
सर्दियों में कहाँ छिपती छिपकलियाँ..
गौरतलब है कि कोई भी जैविक हार्मोन बीस से चालीस डिग्री सेल्सियस में सही तरीके से काम कर पाता है। बता दे कि सभी स्तनधारियों का तापमान हमेशा निश्चित रहता है। हालांकि उभयचर और सरीसृप में ऐसा नहीं होता। यही वजह है कि वह न तो ज्यादा गर्मी और न ही ज्यादा सर्दी को बर्दाश्त कर पाते है। इस दौरान वे धरती में बने बिल या दीवारों की दरारों में घुस जाते है और उनकी उपापचय क्रियाएं भी कम हो जाती है। ऐसे में उनकी एनर्जी भी ज्यादा खर्च नहीं होती। ये सब इसलिए होता है ताकि वे ज्यादा समय तक बदलते मौसम में सरवाइव कर सके। फिर जैसे ही मौसम बदल जाता है, वे सामान्य हो जाती है।
यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि छिपकलियां ठंड के मौसम में हाइबरनेट करती है। इस दौरान वे चट्टानों के नीचे या जिस जगह पर उन्हें थोड़ी सी गर्मी मिलती है वहां अपना घर बनती है। दरअसल छिपकली ठंडे खून वाली या एक्टोथर्मिक किस्म की प्राणी होती है। इसका मतलब ये है कि उनके पास आंतरिक हीटिंग क्षमता नहीं होती है। जिसके कारण वे सर्दियों में एकदम गायब हो जाती है। अब तो आपको पता चल गया होगा कि आखिर सर्दियों में कहाँ छिपती छिपकलियाँ और आखिर क्यों इस मौसम में वे कम नजर आती है। दोस्तों आपको यह जानकारी कैसी लगी, ये हमें जरूर बताईयेगा।


