ऋषि के मुस्कान के थे कोरोड़ो दीवाने
जानकारी के लिए बता दें कि फिल्म ‘शर्माजी नमकीन’ इसी सप्ताह रिलीज हुई है। वहीं, अभिनेता ऋषि कपूर ने हिंदी सिनेमा को इतराना सिखाया है। जहां उनकी फिल्मों का अपना एक अलग आभा मंडल भी रहा है। हालांकी, ऋषि के मुस्कान के उनकी मुस्कान के करोड़ों लोग दीवाने थे। दरअसल, ऋषि कपूर की आखिरी फिल्म ‘शर्माजी नमकीन’ उनके चाहने वालों के सामने आ गई हैं।
इस फिल्म की आएगी याद
आपको बता दें कि फिल्म देखते समय आपको ऋषि कपूर की पिछली फिल्मों ‘राजमा चावल’ और ‘दो दूनी चार’ की याद जरूर आएगी। वहीं, फिल्म में ऋषि कपूर के कैमरे के सामने आखिरी अभिनय के लिए तो देखना बनता है। वहीं, इस फिल्म को इसलिए भी देखना चाहिए कि किस तरह अभिनेता परेश रावल ने जो ऊष्मा भरी है, वह काबिले तारीफ है।
जिंदगी जीने का है अपना अलग स्वाद
हालांकि, फिल्म में ‘शर्माजी नमकीन’ कहानी प्रकार है एक ऐ से सेवानिवृत्त इंसान की जो अब भी खुद को रिटायर नहीं मानता। जहां उसका जिंदगी जीने का अपना एक स्वाद है। वह सादी दाल जैसी जिंदगी नहीं जीना चाहता। घर वाले उसकी सुने ना सुने, वह अपनी धुन का तड़का है। जहां दोस्त सलाह देते हैं। वह इरादे बांधता है। देश में जैसे जैसे बुजुर्गों की संख्या में इजाफा हो रहा है, इस तरह की कहानियां बननी बहुत जरूरी हो चली हैं, जिनमें 60 के ऊपर हो चले लोगों को परिवार पर बोझ न माना जाए।