देश का दूसरा सबसे लंबे समय तक चलने वाला “राम जन्म भूमि एवं बाबरी मस्जिद” विवाद का अंतिम फ़ैसला आज दिनांक दस नवम्बर को देश के उच्चतम न्यायालय में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने एक मत से सुना दिया है।
फ़ैसले के अनुसार विवादित भूमि ट्रस्ट को सौंप दी गई है। तथा वहाँ तीन महीने के भीतर मन्दिर बनाया जाएगा। मतलब फ़ैसला रामलला विराजमान के पक्ष में आया है।
इसके अलावा कोर्ट ने फ़ैसला पढ़ते समय यह कहा की हमारे लिए सभी धर्म एक समान हैं और इसिलिये सुन्नी वक़्फ बोर्ड को अयोध्या में कहीं भी 5 एकड़ भूमि दी जाएगी। इसका फ़ैसला मुस्लिम पक्ष के साथ मिलकर सरकार तय करेगी की भूमि कहाँ दी जाएगी।
तीसरे पक्ष यानी की “निर्मोही अखाड़े” का पक्ष खारिज कर दिया गया तथा उसे ट्रस्ट के ही साथ मिला दिया गया है।
फ़ैसला आने के बाद और पहले भी लगातार लोगो से शान्ति कायम रखने की अपील की जा रही है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, कवि व राज्नेता कुमार विश्वास समेत कई लोगों ने शान्ति बनाए रखने की व फ़ैसले के सम्मान को बनाए रखने का आग्रह किया है। इसके साथ ही सरकार ने सभी राज्यों में हिंसा या उपद्रव को रोकने के लिए विशेष सुरक्षा का इन्तेजाम किया है।