भारत की महान “ट्रैक और फील्ड की रानी” ऐथलीट पी टी उषा को उनके खेल में योगदान को देखते हुए बुधवार को विश्व ऐथलेटिक्स संचालन संस्था द्वारा ‘वेटरन पिन’ से सम्मानित किया गया।
आईएएएफ प्रमुख सेबेस्टियन को ने यहां 52वें आईएएएफ कांग्रेस के दौरान वेटरन पिन भेंट की। पी टी उषा के साथ एशिया के तीन और खिलाड़ियों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
उषा ने ट्वीट किया,
‘दोहा में 52वीं आईएएएफ कॉन्फ्रेंस में वेटरन पिन से सम्मानित करने के लिए मैं आईएएएफ और अध्यक्ष सेबेस्टिन को का आभार व्यक्त करती हूं। मैं अपने देश में ऐथलेटिक्स को बढ़ावा देने के लिए योगदान जारी रखूंगी।’
Expressing my deep gratitude towards @iaaforg and President @sebcoe for awarding me the Veteran Pin at the 52nd IAAF conference in Doha. I look forward to continually contributing to the growth of athletics in our country!@IAAFDoha2019 #IAAFDoha2019 pic.twitter.com/pKUcly1EsV
— P.T. USHA (@PTUshaOfficial) September 25, 2019
उषा का यादगार प्रदर्शन 1984 लॉस एंजिल्स ओलिंपिक में रहा जिसमें वह 400 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल्स में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनी थीं लेकिन एक सेकंड के 100वे हिस्से से ब्रॉन्ज मेडल से चूक गई थीं। उन्होंने 1985 जकार्ता एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज के अलावा पांच स्वर्ण पदक -100 मी, 200 मी, 400 मी, 400 मी बाधा दौड़ और चार गुणा 400 मी रिले- जीते हैं।
कौन है पी टी उषा
पिलावुळ्ळकण्टि तेक्केपरम्पिल् उषा (जन्म २७ जून १९६४), भारत के केरल राज्य की एथलीट हैं। जिन्हे सभी पी॰ टी॰ उषा के नाम से जानते हैं। इस धाविका को हम सब”भारतीय ट्रैक और फ़ील्ड की रानी” उपनाम से भी जानते है। पी॰ टी॰ उषा भारतीय खेलकूद में 1979से हैं। वे भारत के अब तक के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक है।।
जैसा कि हम सब जानते हैं केरल के कई हिस्सों में परंपरा के अनुसार ही उनके नाम के पहले उनके परिवार/घर का नाम है। उन्हें “पय्योली एक्स्प्रेस” नामक उपनाम दिया गया था।
पी टी उषा की उपलब्धियां
पी टी उषा ने अब तक 100 से भी अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। उ उन्हें वर्ष 1984 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साथ ही उसी वर्ष उन्हें पद्य श्री पुरस्कार भी प्रदान किया गया। उन्होंने रेलवे में सेवा भी प्रदान की है। वे भारत की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक है।
