14 जलाई को इंगलैंड में आईसीसी विश्वकप का 12 वाँ संस्करण आयोजित किया गया। फाइनल मैच 2015 की उप विजेता न्यूज़ीलैन्ड एवं 27 साल बाद फाइनल में उतरी टीम इंगलैंड के बीच खेला गया। विडम्बना यह है की इंगलैंड ने विश्व कप अपने नाम तो कर लिया लेकिन कितने रन और कितने विकेट से किया ये कभी बताया नहीँ जा सकेगा
कोई कम या ज्यादा नहीँ
न्यूज़ीलैन्ड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 241 रनों का लक्ष्य मेजबान देश इंगलैंड के सामने रखा। विश्व कप फाइनल का दबाव शुरु से दोनों पक्षों में स्पष्ट दिख रहा था। जब 27 सालों बाद इंगलैंड टीम फाइनल में बल्लेबाजी करने उतरी तो निश्चित रूप से 242 रनों का लक्ष्य लेकर उतरी। लेकिन जब मात्र एक गेंद बची थी और 2 रनों की आवश्यकता थी तब किसी भी तरह से इंगलैंड पीछे नहीँ रह जाना चाहता था। स्टोक्स के बल्ले से जैसे ही गेंद लगी वो 2 रनों के लिए दौड़े। लेकिन दूसरे रन में रन को पूरा नहीँ कर पाए।
अब दोनों ही 241 के स्कोर के साथ मैदान में थे। ऐसे में सुपर ओवर खिलाया गया। जिसमें दोनों पक्षों के पास 1-1 ओवर अतिरिक्त था। इस ओवर में जो टीम अधिक रन बनाती वो विश्व कप उठाती। लेकिन इतने करीब आकर हारना ना न्यू जीलैंड को मंजूर था और ना ही इंगलैंड को। यहाँ इंगलैंड ने 15 रन बनाकर 16 रनों का लक्ष्य सामने रख दिया। लेकिन यहाँ न्यू जीलैंड भी 15 ही रन बना पाई।
इस तरह से मैच टाइ रहा।
आईसीसी के नियम की आलोचना
जब दोनों ही बार मैच का रुख किसी भी एक की ओर नहीँ झुका तो 1 मिनिट के लिए दर्शकों को लगा की विश्व कप पर दोनों देशों का संयुक्त रूप से अधिकार है। लेकिन आईसीसी का नियम यह कहता है की, ऐसी स्थिति में कुल बाउंडरी यानी चौके और छक्के की अधिकता वाली टीम विजेता होगी। और आईसीसी के इसी नियम के तहत इंगलैंड विश्व विजेता बना। गौतम गंभीर,हर्भजन सिंह सिंह समेत कई खिलाड़ियों ने इसे हस्यास्पद बताया। वहीं न्यूज़ीलैन्ड की पत्रिकाओं ने “22 खेल लेकिन विजेता कोई नहीँ”, ” हमारे साथ छल” हुआ है” के साथ यह तो स्पष्ट कर दिया की वो इंगलैंड को विजेता नहीँ मान रहे।
न्यूज़ीलैन्ड बनाम इंगलैंड – समान स्कोर बाउंड्री के आधार पर विजेता