ऐसे समय में जब बॉलीवुड अलग हटकर विषयों पर फिल्में बना रहा है, करन जौहर भी अपनी रोमांटिक फिल्मों से हटकर लाए हैं एक हॉरर मूवी। भानु प्रताप सिंह द्वारा निर्देशित भूत: द हॉन्टेड शिप बॉलीवुड हॉरर फिल्मों की जमात में एक जोड़ है। फिल्म शुरू होती है पृथ्वी(विकी कौशल) के साथ जो अपनी पत्नी और बेटी को याद करते हुए जिनको वो एक भयावह एक्सीडेंट में खो देते हैं। पृथ्वी को Sea Bird नाम के एक समुद्री जहाज का इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर बनाया जाता है, जो कि मुंबई के समुद्र तट पर कहीं से आ जाती है। पृथ्वी एक ऐसा किरदार है जो हर उस जगह पहुंचना चाहता है जहां वो मदद कर सकता है, शायद इसलिए क्योंकि वो अपनी पत्नी और बच्ची को नहीं बचा पाता। Sea Bird के इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर बनाए जाने के बाद धीरे-धीरे पृथ्वी को पता चलता है कि जहाज भूतिया है। फिल्म का दूसरा हाफ हॉरर के स्रोत का पता लगाने और उसके साथ क्या होता है उसके बारे में है।
किसी भी हॉरर फिल्म कि आत्मा कंप्युटर ग्राफिक्स और मेकअप में होती है, और भूत: द हॉन्टेड शिप सबसे ज्यादा यहीं पीछे है। फिल्म में बहुत सी बार कंप्युटर ग्राफिक्स द्वारा बनाए गए बैकग्राउंड बहुत ही ज्यादा नकली लगते हैं। भूतों का मेकअप औसत दर्जे का है और बिल्कुल असली नहीं लगता। मेकअप इतना खराब है कि फिल्म भूतों के आने के पहले जितनी डरावनी होती है उनके आने के बाद उतनी ही हास्यास्पद हो जाती है।
भूत: द हॉन्टेड शिप सिनेमेटोग्राफी के मामले में कमाल कर जाती है। फिल्म के कुछ सीन्स इतने बढ़िया तरीके से फिल्माए गए हैं कि वो वाकई डरा देते हैं।
भूत: द हॉन्टेड शिप का साउन्डट्रैक काफी डरावना है और यह उन जगह पर कमी को पूरा करता है जहां CG और मेकअप आपको निराश करते हैं। साउन्डट्रैक पूरी मूवी में हर जगह आपको बिल्कुल सही और डरावना लगेगा।
विकी कौशल ने पृथ्वी को बहुत उम्दा तरीके से जिया है। विकी कौशल कि ऐक्टिंग वाकई देखने लायक है। उन्होंने पृथ्वी का किरदार काफी प्रभावी ढंग से निभाया है और सारे जज़्बात डाले हैं जो एक पिता और पति अपनी बेटी और पत्नी को खोने के बाद महसूस करता है।
भूमि पेडनेकर स्क्रीन पर काफी कम समय होती हैं लेकिन वो उतने में भी कमाल कर जाती हैं।
आशुतोष राणा भूत और उनसे जुड़ी गतिविधियों के एक्सपर्ट का किरदार निभाते हैं।
सब कुछ देखने के बाद कहा जा सकता है कि जहां विकी कौशल जबरदस्त काम करते हैं पृथ्वी का किरदार निभाने में, भूत: द हॉन्टेड शिप इतनी भी डरावनी नहीं है और ज्यादातर वयस्क दर्शकों को ये फ़िल्म नहीं डरा पाएगी। मैं इस फिल्म में यह देखने गया था कि क्या बॉलीवुड ने हॉरर फिल्मों के मद्देनजर कंप्यूटर ग्राफ़िक्स और मेकअप में मामले में अपने आप को विकसित किया या नहीं, और बड़े दुख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि मुझे बस निराशा हाथ लगी।
मैं इस फ़िल्म को 5 में से 2.5 स्टार्स दूंगा।

