भारत के लोगों की पहचान पूरे विश्व के अंदर ईमानदारी के लिए, निश्छल होने, निष्कपट होने के लिए थी. इसके के कई प्रमाण मिलते हैं. यूनानी लेखक एरियन ने अपनी पुस्तक में इसका जिक्र किया है. भारत के अंदर कभी दास प्रथा नहीं थी. स्त्रियों का सम्मान किया जाता था. मगर धीरे धीरे भारत जातियों में बंटने लगा. लोगों के अंदर राष्ट्र की भावना खत्म होने लगी और राज्य की भावना समाहित होने लगी. यही छोटी छोटी बातें हमारे देश के गुलाम हों का कारण बनी. ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्णगोपाल द्वारा संकल्प द्वारा आयोजित पांचवी वार्षिक व्याख्यानमाला में कहीं गयीं.
सिंधु पर्वत से सिंधु नदी तक भारत एक है
शनिवार को दिल्ली के तीन मूर्ति मार्ग स्थित तीन मूर्ति भवन में पूर्व सिविल सेवा अधिकारी फोरम द्वारा पाचंवी वार्षिक व्याख्यानमाला का आयोजन करवाया गया. यह दो दिवसीय आयोजन था जिसके उद्घाटन सत्र को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह कृष्णगोपाल द्वारा सम्बोधित किया गया. उन्होंने ‘धर्म की ग्लानि विषय’ पर व्याख्यान देते हुए भारत के अंदर धर्म की महत्वता पर प्रकाश डाला था. उन्होंने कहा ‘ सिंधु पर्वत से सिंधु नदी तक भारत एक है, मगर लोगों के अंदर राष्ट्र के बजाय राज्य की भावना समाहित होने के कारण देश को गुलाम होना पड़ा.
भारत के लोग ईमानदार हैं, निश्छल हैं, निष्कपट हैं
एक राष्ट्र के अंदर बहुत से राज्य बन गए और उन राज्यों के अंदर भी जातियां बन गयीं. जो लोगों के असंगठित होने का कारण बना. जहाँ एक हजार वर्ष पूर्व भारत के अंदर महज एक हजार जातियां थी वहीं आज भारत के अंदर जातियों की संख्या 6 हजार हो गयी है. यूनानी लेखक एरियन अपनी पुस्तक ‘प्रिंसिपल ऑफ़ सोसाइटी’ में लिखता है कि भारत के लोग ईमानदार हैं, निश्छल हैं, निष्कपट हैं, भोले हैं, झगड़ालू नहीं हैं, चोरी नहीं करते हैं, सम्पन्न भी हैं. मगर जातियों में बंटे होने के कारण असंगठित हैं.
गोमांस खाने वालों को माना जाता था अछूत
कृष्णगोपाल ने कहा कि भारत के अंदर कभी दास प्रथा नहीं रही मगर छुआछूत की प्रथा थी. छुआछूत के प्रमाण भी मिलते हैं. मगर अछूत जाति के आधार पर नहीं बल्कि वो लोग माने जाते थे जो गोमांस खाते थे. गोमांस खाने वालों को मलेक्ष समझा जाता था और इस्लाम के मानने वाले गोमांस खाते थे. इसलिए उनको अछूत माना जाता था मगर बाद में अछूत के मायने बदलते चले गए और यह जातियों में समाहित हो गया. बताते हैं कि जब गाँधी जी के बेटे ने एक गोमांस खाने वाले के यहाँ भोजन कर लिया तो गाँधी जी परेशान हो गए और मदन मोहन मालवीय के पास जाकर अपना दुःख व्यक्त किया. जिसके बाद मदन मोहन मालवीय ने उस लड़के के मुंह में तुलसी दल रखकर शुद्ध किया.
दुल्हन को माना जाता है पति के घर की साम्राज्ञी
भारत के अन्दर नारियों का विशेष स्थान रहा है. यह गार्गी, सावित्री और इंद्राणी का देश है. मगर आधुनिक भारत में स्त्रियों की हालत ख़राब होती चली गयी. उनका अपमान किया जाने लगा.ऋग्वेद के अनुसार दुल्हन को पति के घर की साम्राज्ञी माना जाता है, इसीलिए उसे सजा धजाकर लाया जाता है. बाद में महिलाओं के लिए परदे और विधवा विवाह न होने जैसी कुप्रथाएं शुरू हो गयीं. जबकि अजंता एलोरा की गुफाओं में बनी मूर्तियों को देखिये उन पर कोई पर्दा नहीं है. पुरुषों के लिए बहुविवाह जैसी कुरीतियां शुरू हो गयीं. एक एक पुरुष 50-50 विवाह करने लगा. बाल विवाह होने शुरू हो गए, जिसके खिलाफ पश्चिम बंगाल में ईश्वर चंद विद्यासागर खड़े हुए थे.
भारत के अंदर रही है निशुल्क शिक्षा की नीति
आज की बिगड़ी हुई शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते कृष्णगोपाल ने हुए कहा था कि आज भारत के अंदर इतनी महंगी शिक्षा होना अंग्रेजों द्वारा शुरू की गयी कुरीति का परिणाम है. भारत के अंदर कभी शिक्षा के लिए शुल्क देने की प्रथा नहीं रही. भारत के अंदर हमेशा आश्रमों- गुरुकुलों में निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती थी. आज लोगों को लाखों रूपये शिक्षा के लिए खर्च करने पड़ते हैं. उन्होंने बताया कि हमें संपत्ति को अपनी समझने की भूल कभी नहीं करनी चाहिए. सम्पत्ति समाज की है और उसे समाज के हित में ही लगाना चाहिए.
पांच साल से लागातार किया जा रहा है कार्यक्रम
आपको बता दें कि इस कार्यक्रम का आयोजन युवाओं के बीच जागरूकता फ़ैलाने के लिए पिछले पांच साल से लागातार किया जा रहा है. जिसमे हर बार कृष्णगोपाल अपना मार्गदर्शन देते हैं. पिछले चार वर्ष से इस कार्यक्रम को ‘संकल्प’ द्वारा आयोजित करवाया जा रहा था मगर इस बार ‘पूर्व सिविल सेवा अधिकारी फोरम’ द्वारा इसका आयोजन करवाया गया. इस फोरम के अध्यक्ष डा. जी प्रसन्न कुमार हैं जो 1975 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस रहे हैं.
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम के दौरान के पूर्व प्रशासक मंच के अध्यक्ष डा. जी. प्रसन्न कुमार, विशिष्ट अतिथि ग्लेज ट्रेडिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक चेतन हांडा, समाजसेवी बिशनलाल गुप्ता, रिलायंस रिटेल के वाईस प्रेजिडेंट अश्विनी राठौर समेत तमाम प्रबुध्द लोग मौजूद रहे. पूरे कार्यक्रम का सञ्चालन कन्हैया कुमार द्वारा किया गया.


