ईद उल फित्र इस वर्ष 5 जून को है। प्रत्येक वर्ष यह इस्लामी कैलेंडर के 10 वे महीने व शव्वाल के पहले दिन मनाया जाता है । ईद उल फित्र रमजान के चाँद डूबने व ईद के चाँद नज़र आने पर मनाया जाता है।इसके पहले तीस दिनों का रोज़ा रखा जाता है। रोजे के दौरान खाने पीने व साफ़ सफ़ाई में सख्ती बरती जाती है। इसके बाद ईद के दिन सुबह से नमाज पढ़ कर अल्लाह को धन्यवाद दिया जाता है की उन्होने 30 दिन रोजा रखने की ताकत दी। साथ ही आगे भी क्षमता देने की प्रार्थना करते हैं।
नमाज अदा करने के बाद घर में कई प्रकार के पकवान बनते हैं। पकवानों में सेवैयाँ सबसे खास होती है। इस त्योहार की खूबसूरती यह है की ये है, तो मुख्यत: इस्लामी त्योहार लेकिन भारत में ईद की सेवैयाँ सभी धर्म के लोगों को जोड़ देती है और सभी अपने करीबी दोस्तों के यहाँ इस त्योहार को मनाने जाते हैं।इसिलिये इसे आपसी भाईचारे व प्रेम का त्यौहार कहा जाता है।

इस दिन को खुशियों से मनाने की शुरूआत तब हुई थी। जब पैगम्बर मोहम्मद साहब को बद्र के युद्ध में विजय प्राप्त हुई थी। इसिलिये ये माना जाता है की चाहे गरीब हो या अमीर इस दिन को खुशी से मनाने का अधिकार सभी को है इसिलिये इस दिन लोग अपने हैसियत के हिसाब से दान भी करते हैं। इस दान को इस्लाम में ज़कात कहा जाता है।
भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ जितनी खुशी से दीपावली मनाया जाता है उतनी ही खुशी से क्रिस्मस और ईद भी मनाया जाता है। ईद मुबारक हर लफ्ज़ कहता है चाहे किसी भी धर्म का हो। गले मिलना इस बात को दिखाता है की चाहे कुछ भी हो जाए हम सब एक हैं। इस दिन बड़े अपने से छोटों को उपहार देते हैं जिसे ईदी भी कहा जाता है।
इस प्रकार पैगम्बर मोहम्मद साहब के विजय के इस दिन को बड़े ही उत्साह से प्रति वर्ष याद किया जाता है।