यूँ तो हर व्यक्ति अपने जीवन में यह दुआ जरूर करता है कि उसे कभी डॉक्टर के पास न जाना पड़े। यानि वह कभी किसी बीमारी का शिकार न हो। मगर आज कल हर व्यक्ति की लाइफ इतनी तनाव भरी हो चुकी है, कि न चाहते हुए भी उसका पाला डॉक्टर से पड़ ही जाता है। ऐसे में हर व्यक्ति चिकित्सा से जुडी हर छोटी से छोटी जानकारी के बारे में पता होना जरूरी है। इसलिए आज हम आपको बताना चाहते है कि ऑपरेशन करने के बाद डॉक्टर टाँके भरने के लिए जिस धागे का इस्तेमाल करते है वह वास्तव में किस तरह का धागा होता है। जिससे व्यक्ति के टाँके जल्दी भर जाते है।
ऑपरेशन करने के बाद टांका लगाने के लिए इस धागे का होता है इस्तेमाल..
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि टाँके लगाने के लिए डॉक्टर जिस धागे का इस्तेमाल करते है, वह आमतौर पर भेड़ या बकरियों की आँतों से पाया जाता है। इसके इलावा कैटगट द्वारा बने रेशे का इस्तेमाल शरीर की भीतरी चीर फाड़ के दौरान टाँके लगाने के लिए किया जाता है। दरअसल शरीर के भीतरी हिस्सों में टाँके लगाने के लिए इन रेशो का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है ताकि वह खुद बखुद अंदर गल जाएँ और मरीज को कोई दिक्क्त भी न हो। गौरतलब है कि इस दौरान दो तरह के टाँके इस्तेमाल में लाये जाते है।
जैसे कि शरीर के अंदरूनी हिस्सों का ऑपरेशन करने के बाद ऐसे धागो से टाँके लगाए जाते है, जो कुछ समय के बाद खुद बखुद गल जाते है। जब कि शरीर के बाकी हिस्सों में टांका लगाने के लिए अलग धागे का इस्तेमाल किया जाता है। जो खुद बखुद नहीं गलते और जिन्हे समय समय पर डॉक्टर के पास आकर निकलवाना पड़ता है। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मरीज इन चीजों के बारे में नहीं सोचता, बल्कि केवल अपनी बीमारी के बारे में ही सोचता है। मगर फिर भी चिकित्सा के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी होना बहुत जरूरी है। वैसे दोस्तों आपको यह जानकारी कैसी लगी ये हमें जरूर बताईयेगा।


