जल्द आप मेड इन इंडिया हवाई जहाज से सैर कर सकेंगे। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाया डॉर्नियर-228 विमान को इसकी अनुमति मिल गई है। अभी तक डॉर्नियर भारत के साथ अन्य देश की सेनाओं में अपनी सेवाएं दे रहा है।
डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने देश में हवाई यात्रा सुलभ कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डॉर्नियर को यात्री विमान में शामिल करने की अनुमति दी है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जर्मन कंपनी डॉर्नियर ने मिलकर 1985 में इस विमान को बनाना शुरू किया था, तब देश के बाहर भी इसके निर्माण का काम होता था। लेकिन अब इस विमान को पूरी तरह से भारत में बनाया जाता है। अभी तक भारतीय सेना, भारतीय कोस्ट गार्ड के साथ कई अन्य देशों की सेना भी इस विमान का इस्तेमाल करती हैं। 19 सीटों वाला यह विमान खराब मौसम और अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है। इसकी अधिकतम रफ्तार 448 किमी प्रति घंटे की है। एचएएल के अधिकारियों के अनुसार एयर इंडिया जल्द 20 डॉर्नियर विमान खरीद सकता है। एचएएल की कानपुर यूनिट में 63 डॉर्नियर बनकर तैयार भी हैं। देश के उन छोटे इलाकों में जहां विमान सेवाओं का विस्तार नहीं हुआ है वहां के लिए डॉर्नियर उपयुक्त साबित हो सकता है।
डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने देश में हवाई यात्रा सुलभ कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डॉर्नियर को यात्री विमान में शामिल करने की अनुमति दी है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और जर्मन कंपनी डॉर्नियर ने मिलकर 1985 में इस विमान को बनाना शुरू किया था, तब देश के बाहर भी इसके निर्माण का काम होता था। लेकिन अब इस विमान को पूरी तरह से भारत में बनाया जाता है। अभी तक भारतीय सेना, भारतीय कोस्ट गार्ड के साथ कई अन्य देशों की सेना भी इस विमान का इस्तेमाल करती हैं। 19 सीटों वाला यह विमान खराब मौसम और अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है। इसकी अधिकतम रफ्तार 448 किमी प्रति घंटे की है। एचएएल के अधिकारियों के अनुसार एयर इंडिया जल्द 20 डॉर्नियर विमान खरीद सकता है। एचएएल की कानपुर यूनिट में 63 डॉर्नियर बनकर तैयार भी हैं। देश के उन छोटे इलाकों में जहां विमान सेवाओं का विस्तार नहीं हुआ है वहां के लिए डॉर्नियर उपयुक्त साबित हो सकता है।
