देश को सुपर पावर बनाने की दिशा में नई शिक्षा नीति

नई शिक्षा नीति

नई शिक्षा नीति का मतलब यह समझिए कि कब तक स्कूलों में पड़ है। ग्रेजुएशन कितने साल का होगा। बोर्ड की परीक्षाएं कौन सी क्लास में होगी। इस तरह के नियम तय करने वाली नीति और इन नियमों को एक नई नीति मोदी सरकार लेकर आई है। जिसे न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 नाम दिया गया है। नई शिक्षा नीति लाने के जरूरत क्यों पड़ी। सबसे बड़ी बात यह है कि बदलते समय की जरूरतों को पूरा करने के लिए, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए, इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा देने और देश को ज्ञान का सुपर पावर बनाने के लिए नई शिक्षा नीति की जरूरत है।

अभी जो देश में शिक्षा नीति चल रही है 1986 में राजीव गांधी सरकार के दौरान लागू की गई थी। और उसके बाद 1992 में इसमें थोड़ा बदलाव किया गया था।लेकिन जो सिस्टम अब मोदी सरकार बदल देगी। अभी बी ए, बीएससी जैसे ग्रेजुएशन कोर्स 3 साल के होते हैं अब नई वाली पॉलिसी में दो तरह के विकल्प होंगे जो नौकरी के लिए लिहाज से पढ़ रहे हैं। उनके लिए 3 साल का ग्रेजुएशन और जो रिसर्च में जाना चाहते हैं उनके लिए 4 साल के लिए हो।1 साल पोस्ट ग्रेजुएशन और 4 साल की पीएचडी की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। एमपी का कोर्स खत्म कर दिया गया है।

नई शिक्षा नीति

मल्टी डिसीप्लिनरी एजुकेशन होगी

यानी कि कोई स्कीम नहीं होगी कोई भी मन चाहे सब्जेक्ट चुन सकता है यानी अगर कोई फिजिक्स में ग्रेजुएशन कर रहा है और उसकी म्यूजिक में रुचि है तो म्यूजिक भी साथ में पड़ सकता है आर्ट्स और साइंस वाला मामला अलग अलग नहीं रखा जाएगा हालांकि इसमें मेजर और माइनर सब्जेक्ट की व्यवस्था होगी कॉलेजों को ग्रेटर ऑटोनॉमी होगी अभी एक यूनिवर्सिटी से एफिलिएटिड कई कॉलेज होते हैं जिसकी परीक्षा यूनिवर्सिटी करती है अब कॉलेज को भी स्वायत्तता दी जाएगी।

अब स्कूलों मैं बदलाव की बात करते हैं। अभी हमारी स्कूल ही सिस्टम टेन प्लस टू है यानी दसवीं तक सारे सब्जेक्ट और 11वीं में स्टीम तक करनी होती है। नए सिस्टम को 5 प्लस 3 प्लस 3 प्लस 4 बताया गया है। इसमें स्कूल के आखिरी 4 साल यानी नौकरी से लेकर 12वीं तक एक समान माना गया है। जिसमें सब्जेक्ट गहराई से पढ़ाई जाएंगे। लेकिन इस टीम चुनने की जरूरत नहीं होगी मल्टीस्क्रीन पढ़ाई होगी। फिजिक्स वाला चाहे तो हिस्ट्री भी पढ़ पाएगा या नहीं कोई एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी जैसे म्यूजिक या कोई गेम है तो उसे भी एक सब्जेक्ट की तरह ही शामिल कर लिया जाएगा। ऐसी रूचि वाले विषयों को एक्स्ट्रा नहीं माना जाएगा। सभी बच्चे 3, 5 और 8 की स्कूल की परीक्षा देंगे। ग्रेड 10 और 12 के लिए बोर्ड परीक्षा जारी रखी जाएगी। लेकिन इन्हें नया स्वरूप दिया जाएगा एक नया राष्ट्रीय आकलन केंद्र परख स्थापित किया जाएगा।

 

 

 

 

Ankita Sinha

अंकिता सिन्हा "कवयित्री"

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