देश में ओडिशा राज्य में स्थित गोल्डन बीच को एफईई डेनमार्क द्वारा प्रतिष्ठित ‘ब्लू फ्लैग’ सर्टिफिकेशन सम्मान प्राप्त हुआ है। यह बीच देश के उन आठ समुद्र तटों में आता है जिन्हें ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन से सम्मानित किया जा चुका है। अपको बता दें कि इस बात की जानकारी राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने खुद दी है।
सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर सीएम नवीन पटनायक ने ट्वीट किया है कि, “जानकारी शेयर करते हुए बेहद खुश हूं कि एफईई डेनमार्क की तरफ से गोल्डन बीच को ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन मिला है। यह इको-लेबल विश्व स्तरीय हैरिटेज सिटी के आकर्षण में चार चांद लगाएगा।”
आगे बढ़ने से पहले आइए जानते हैं कि एफईई और ‘ब्लू फ्लैग’ सर्टिफिकेशन क्या है।
वर्ष 1987 में फाउंडेशन फॉर एनवायरनमेंट एजुकेशन की स्थापना की गई थी। तब के समय में सिर्फ पांच देश इसके सदस्य थे। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से सतत विकास को बढ़ावा देना है। यह पांच कार्यक्रमों के माध्यम से सक्रिय है। इनमें एक ‘ब्लू फ्लैग’ है।
इसके बारे में जानिए
प्रतिष्ठित ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन एक वैश्विक सम्मान है जो साफ और सुरक्षित समुद्र तटों को प्राप्त होता है। यानी अगर कोई समुद्र तट एफईई के 33 मानदंडों पर खड़ा उतरता है, जिनमें पर्यावरण, शैक्षिक, और सुरक्षा आदि शामिल तो उसे इस सम्मान से नवाजा जाता है। भारत के आठ समुद्र तटों को ब्लू फ्लैग सर्टिफिकेशन सम्मान प्राप्त हो चुका है।
ब्लू फ्लैग सर्टिफाइड समुद्र तटों के बारे में जानें
देश के आठ समुद्र तटों की एक साथ यह सर्टिफिकेशन दिया गया है। इन समुद्र तटों में शिवराज बीच (द्वारका-गुजरात), घोघला (दीव), कासरकोड और पदुबिद्री बीच (कर्नाटक), कप्पड़ बीच (केरल), रुशिकोंडा बीच (आंध्रप्रदेश), गोल्डन बीच बीच (ओडिशा) और राधानगर बीच (अंडमान-निकोबार) शामिल हैं। खास बात यह है कि एफईई के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी देश के 8 समुद्र को एक साथ यह सम्मान मिला हो।
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