‘किंग ऑफ पॉप’ कहे जाने वाले मशहूर सिंगर माइकल जैक्सन का जन्म 29 अगस्त 1958 को हुआ था। वह अपने माता पिता के सातवें बच्चे थे। शुरू से ही जैक्सन परिवार संगीत से जुड़ा हुआ था। माइकल के पिता जोसेफ पेशे से तो एक क्रेन ऑपरेटर थे लेकिन एक स्थानीय बैंड ‘फॉल्कन’ में गिटार भी बजाया करते थे। वहीं, मां कैथरीन भी गिटार बजाने में रुचि रखती थीं और उन्होंने ने ही अपने बच्चों को संगीत की शिक्षा दी।
अब बात करते हैं माइकल जैक्सन की उदास भरी ज़िन्दगी की। आखिर किन गमों को दिल में लिए इस रॉकस्टार ने इतने उदास गानें गए। अपको बता दें कि 5-6 साल की उम्र में ही माइकल को स्टेज से प्यार हो गया था। लेकिन कहा जाता है कि उनके पिता के सख्त अनुशासन ने माइकल के साथ साथ उनके भाइयों का बचपन भी रूखा कर दिया था। उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में भी बताया था कि किस तरह उनके पिता सख़्त रविए के साथ बेल्ट घुमा-घुमा कर अपने बच्चों को परफॉर्मेंस की रिहर्सल करवाते थे।
पिता की सख़्ती का इस बात से ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उनके बच्चों को अपने पिता को डैडी पुकारना मना था। अपने पिता के अशिष्ट व्यवहार के कारण वह काफ़ी दफा अपने घर से भाग जाया करते थे।
भीड़ में रहने वाले स्टार को अकेलापन क्यों खाता था, जानिए
छोटी उम्र से ही भीड़ में रहने वाले माइकल खुद को हमेशा अकेला पाते थे। ऐसे तो वह अपने भाइयों के साथ ही परफॉर्म और घुमा करते थे लेकिन बचपन में अपनी उम्र के बच्चों के साथ ना खेल पाने का दर्द उनके दिल में पचास साल की उम्र में भी खटकता था।
कई इंटरव्यू में इस बात को याद कर के माइकल की आखें नम हुई हैं कि कैसे उन्हें तीन घंटे पढ़ाई करने के बाद रात तक स्टूडियों में रिकॉर्डिंग करनी पड़ती थी। और जब रिकॉर्डिंग के दौरान उनके स्टूडियो के पास पार्क में खेलते बच्चों की आवाज़ आती थी तो उनका मन और भी बेताब हो जाता था। जिस उम्र में बच्चे खेलते कूदते हैं उन्हें उस उम्र में करियर के लिए दौड़ लगानी पड़ती थी। मजबूर हो कर भी उन्हें अपनी बेताब ज़िंदगी में अकेले फंसे रहना पड़ता था जहां शोर करने की इजाज़त नहीं थी। इस अकेलेपन के दुख को हमेशा उनके गानों में महसूस किया गया है।
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