हिंदी भाषा, वही हिंदी भाषा जिसने आजादी की लड़ाई के समय पूरे भारत को अंग्रेजों के खिलाफ एक जुट करने का काम किया था. वो हिंदी भाषा ही थी जिसने सारे भारत को एक सूत्र में पिरोने का काम किया था. हिंदी भाषा ही है जिसे न सिर्फ भारत के अंदर संवाद का सबसे बेहतर साधन माना जाता है बल्कि मारीशस जैसे देशों की प्रमुख भाषा भी है. आधुनिक युग में भारत जैसे विकासशील देश में लोगों के अंदर महज एक धारणा बन गयी है कि अंग्रेजी हमें सम्मान दिलाती है, अंग्रेजी हमारे ज्ञान का सीमा मापने का पैमाना है. मगर हकीकत मैं देखा जाए तो आज भी शुद्ध हिंदी में बात करने वाले को हर जगह अधिक सम्मान दिया जाता है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गर्व के साथ विदेशों में जाकर भी हिंदी में भाषण देते हैं. 1977 में पहली बार तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी में संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को संबोधित किया था. संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देकर पूरे विश्व में हिंदी का मान बढ़ाया था.
विश्व की तीसरे नंबर की भाषा है हिंदी
कहा जाता है कि गाँधी जी ने गुजराती होने के बावजूद हिंदी भाषा को ही भारतीयों को एकजुट करने का सबसे उत्तम साधन माना था. गाँधी जी का कहना था कि सिर्फ हिंदी भाषा ही सारे भारतीयों को एकजुट कर सकती है. इसलिए हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलवाया जाना जरूरी है. 1918 में आयोजित हुए हिंदी साहित्य सम्मलेन में भी गाँधी जी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का मुद्दा भी उठाया था मगर राजनीतिक कारणों की वजह से आजतक भारत जैसे हिंदी भाषी बाहुल्य देश में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिल पाया. आकंड़ों की बात करें तो एथनोलॉग के अनुसार पूरे विश्व की तीसरे नंबर की भाषा हिंदी है. पूरे विश्व में लगभग 140 करोड़ लोग हिंदी भाषा बोलते और समझते हैं. अगर सिर्फ भारत की बात करें तो आज भारत में ही कुल जनसंख्या के 43 प्रतिशत लोग हिंदी बोलने और समझने वाले हैं .
आज भी देखेंगे तो पूरे साल में 14 सितंबर को हिंदी दिवस के दिन ही हिंदी को याद किया जाता है, बड़े बड़े भाषण दिए जाते हैं, पत्र-पत्रिकाओं में हिंदी को लेकर लेख प्रकाशित किये जाते हैं. मगर उसके बाद क्या… फिर से हमारी नित्य क्रिया में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग प्रमुख हो जाता है. अगर हम हिंदी भाषा कि महत्वता जो बात करें तो हिंदी का महत्व सिर्फ हिंदी के महत्व महज एक भाषा तक नहीं है बल्कि हिंदी हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है. आईये आज हिंदी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करते हैं.
क्या है हिंदी दिवस का इतिहास?
भारत के अंदर हिंदी भाषा की महत्वता को देखते हुए संविधान सभा द्वारा 1949 में निर्णय लिया गया कि हिंदी भारत कि राजभाषा होगी. भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की धारा 343 (1) में हिन्दी को राजभाषा बनाए जाने के संदर्भ में लिखा गया है, ‘संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा.’ उसके बाद 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाने लगा. 14 सितंबर को ही हिंदी दिवस मनाने के पीछे का एक कारण ये भी बताया जाता है कि हिंदी को राजभाषा बनाने के लिए महादेवी वर्मा, हजारी प्रसाद द्विवेदी, मैथिलि शरण गुप्त जैसे लोगों के साथ ही व्यौहार राजेंद्र सिंहा का लम्बा संघर्ष शामिल था. 14 सितंबर, 1949 को संविधान सभा में जब पूरे बहुमत से हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया तो उस दिन संयोग से व्यौहार राजेंद्र सिंहा का 50वां जन्मदिवस था.
क्यों हर साल मनाया जाता है हिंदी दिवस
हर साल हिंदी दिवस मनाये जाने के पीछ एक प्रमुख उद्देश्य लोगों को हिंदी भाषा का महत्व समझाना होता है. इसको ज्यादा से ज्यादा लोगों द्वारा प्रयोग में लाया जा सके और उन्हें बताया जा सके कि हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है बल्कि हमारी पहचान है. हिंदी साहित्य को लिखने एवं पढ़ने के लिए लोगों को जागरूक किया सके. हिंदी में कहने कवितायेँ आदि लिखने के लिए भी लोगों में रूचि पैदा की जा सके. इन सब चीज़ों के अलावा हिंदी को बढ़ावा देने के लिए लम्बे समय तक संघर्ष करने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार व्यौहार राजेंद्र सिंहा का जन्मदिवस भी इसी दिन पड़ता है. हिंदी दिवस पर उनको भी याद किया जाता है.
कैसे मनाया जाता है हिंदी दिवस?
अब हिंदी दिवस वाले दिन लगभग हर स्कूल कॉलेज में कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. विश्वविद्यालयों और राष्ट्रीय संस्थानों में सेमिनार आयोजित किये जाते हैं जिनमें हिंदी के महत्वता पर चर्चा की जाती है. इसके लिए स्कूल, कॉलेज, कार्यलयों में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. कहानी, कविता, निबंध, डिबेट, साज-सज्जा आदि तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं जिससे लोगों को हिंदी के प्रति लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक किया जा सके. बाद में राजभाषा गौरव पुरुस्कार और राजभाषा कीर्ति पुरुस्कार जैसे पुरुस्कार भी प्रदान किये जाते हैं. राजभाषा गौरव पुरुस्कार योजना के तहत 10 हजार से लेकर २ लाख तक की राशि प्रदान की जाती है. वहीं राजभाषा कीर्ति पुरुस्कार योजना के तहत 39 तरह के पुरुस्कार दिए जाते हैं. यह पुरुस्कार हिंदी भाषा को बढ़ावा देने में उत्कृष्ट योगदान देने वाली समिति, विभाग मंडल आदि को दिया जाता है. पिछले ३ वर्षों से लगातार राजभाषा कीर्ति पुरुस्कार अंतरिक्ष विभाग को दिया जा रहा है.
हिंदी का वर्तमान परिदृश्य
हिंदी के अगर वर्तमान परिदृश्य पर गौर किया जाए तो भारत में आज हिंदी न आना लोगों का फैशन बन चुका है. अंग्रेजी में बात करने को लोग शिष्टाचार समझने लगे हैं. कई बार लोग खुद को योग्य दिखने के उद्देश्य सेअंग्रेजी का प्रयोग करते हैं. अभिवावकों में भी अपने बच्चों को शुरू से ही अंग्रेजी बोलने के आदत डालना अपने लिए गर्व की बात समझते हैं. अंग्रेजी बोलन के साथ साथ लोगों के पहनावे और रहन सहन में भी अंग्रेजी यानि पश्चिमी कल्चर प्रभावी होता जा रहा है. मगर वास्तविक हकीकत ये है कि अंग्रेजी देशों को भी आज हिंदी की महत्वता समझ में आ रही है. यही कारन है कि आज बहुत सी वेबसाइट हिंदी में शुरू हो चुकी हैं. पहले मोबाइल में हिंदी के फॉण्ट नहीं मिलते थे पर आज मोबाइल में हिंदी के फॉन्ट दिए जा रहे हैं.
जनगणना के आंकड़ों के अनुसार 2001 से 2011 के बीच 10 वर्षों में हिंदी बोलने वालों में 25.19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. भारत के अंदर सर्वाधिक समाचार पत्र हिंदी में ही प्रकाशित किये जाते हैं. RNI की रिपोर्ट के अनुसार भारत के अंदर कुल 1,14,820 प्रकाशन रजिस्टर्ड हैं जिनमें से हिंदी प्रकाशनों की संख्या सर्वाधिक 46,827 है. टीवी चैनलों की संख्या भी भारत के अंदर हिंदी चैनलों की ही अधिक है. मोबाइल में प्रयोग होने वाली एप भी हिंदी में बनना शुरू हो चुकी हैं. फेसबुक जैसी बड़ी सोशल मीडिया वेबसाइट ने हिंदी भाषा भी उपलब्ध करवाना शुरू कर कर दिया है. गूगल बड़ी मात्रा में हिंदी में कंटेट डाल रहा है और उसे सर्च करने वालों की संख्या भी करोड़ों में है. बहुत सी सरकारी नौकरियों में आज हिंदी टाइपिंग मांगी जाती है. इसलिए आज भारत की जनता को समझना होगा कि हमारे जीवन में हिंदी भाषा का कितना महत्व वर्तमान में है और कितना भविष्य में होने वाला है.
हिंदी को लेकर कुछ तथ्य
-हिंदी को संविधान सभा में 14 सितंबर, 1949 को राजभाषा का दर्जा मिला
– पहली बार भारत में हिंदी दिवस 14 सितम्बर, 1953 को मनाया गया.
– भारत में कुल जनसख्या का ४३ प्रतिशत लोग हिंदी बोलते हैं.
– अमरीका के अंदर अंग्रेजी के बाद सर्वाधिक बोले जानी वाली भाषा हिंदी है, जिसे 6.5 लाख लोगों द्वारा बोला जाता है.
– भारत में RNI में रजिस्टर्ड कुल प्रकाशनों की संख्या 1,14,820 है, जिनमें से 46,827 प्रकाशन हिंदी के हैं.
– हिंदी की प्रमुख बोलियों में अवधी, भोजपुरी, ब्रजभाषा, छत्तीसगढ़ी, गढ़वाली, हरियाणवी, कुमांऊनी, मागधी और मारवाड़ी भाषा शामिल हैं.
-जनगणना के आंकड़ों के अनुसार 2001 से 2011 के बीच 10 वर्षों में हिंदी बोलने वालों में 25.19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
-1826 में हिंदी के पहले समाचार पत्र (साप्ताहिक) उदंत मार्तंड का प्रकाशन कोलकाता से शुरू हुआ