आई ए एस अफसर शिवप्रसाद मदन नकाते की सफलता की कहानी

आई ए एस अफसर शिवप्रसाद मदन नकाते
सफलता के पीछे अक्सर मेहनत और संघर्ष की कहानी छुपी होती है। जिनके इरादे, सपनों को साकार करने के लिए बनाए जाते हैं, उन्हें शायद कोई नहीं तोड़ सकता। जिन्होंने भी सफलता के मुकाम को हासिल किया है उनके पीछे संघर्ष काफी रहा है। आज ऐसे आई ए एस अफसर शिवप्रसाद मदन नकाते सफलता की कहानी हम आपको बताने जा रहे हैं। शिवप्रसाद मदन नकाते महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव माडा से आते हैं। अपने सपनों को साकार करने के इरादे लेकर चले शिव प्रसाद को मध्य में ३ नौकरियां भी मिली, जीने ठुकराकर उन्होंने लक्ष्य को सामने रखा। तैयारी का नतीजा उनके सामने था, उन्होंने पहले ही प्रयास में आई ए एस के लिए एग्जाम पास किया।
शिवप्रसाद का जन्म किसान परिवार में हुआ
शिवप्रसाद का जन्म महाराष्ट्र में सोलापुर जिला मुख्यालय से करीब ७० किलोमीटर दूर गांव माडा के साधारण किसान परिवार में हुआ था। बचपन गाँव में ही गुजरा। उनके पिता मदन नकाते एक किसान होने के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। पिताजी के नक्शेकदम ही शिवप्रसाद को भी लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रेरणा मिली। ग्रामीण परिवेश के सरकारी स्कूल में मराठी मीडियम में दसवीं तक पढ़ाई की। पढाई के दौरान ही यूपीएससी का सिविल सर्विसेज का एग्जाम पास करके आईएएस बनने का सपना देखा। जिन्होंने भी सपना देखा है और जज्बा पाला है उन्होंने जूनून के साथ साकार भी किया है।
शिवप्रसाद ने पढ़ाई के दौरान ही एक बार बीडीएस और दूसरी बार एमटेक करने के लिए आईआईटी में एंट्रेस टेस्ट पास किया। अभिभावकों की इच्छा थी कि बेटा डॉक्टर बने ताकि गांव के पास किसी शहर में रह कर डॉक्टरी करने के साथ ही अपनी पुश्तैनी खेती का ख़याल रखें। शिवप्रसाद के सामने लक्ष्य था आईएएस बनने का, तो न तो उन्होंने बीडीएस में एडमिशन लिया और न ही आईआईटी में। गांव से होने की वजह से और शहर से दूरी वजह ने कभी कोचिंग करने का मौका नहीं दिया। शुरू से ही स्वाध्याय पर ही जोर दिया और तैयारी शुरू कर दी। परीक्षा की तैयारी के वक्त फोन से दूरी बना ली और समसामयिकी के लिए अखबार की आदत बरकरार रखी। परीक्षा की तैयारी के लिए जरुरी है धैर्य और ध्यान, पूरी मेहनत होर लगन के साथ तैयारी शरू की।
रोजाना १० घंटे परीक्षा की तैयारी और रूटीन की समसामयिकी के साथ ही लक्ष्य की चलता रहा। २०१० में राज्य वन सेवा, महाराष्ट्र प्रशासनिक सेवा और सेंट्रल पुलिस फोर्स में असिस्टेंट कमांडेंट पद पर चयन हुआ। लक्ष्य सिर्फ आईएएस बनने का था, जिसके आगे बड़ी से बड़ी नौकरियां भी रास नहीं आ रही थी। इस वजह तीनों में से कोई नौकरी ज्वाइन नहीं की। महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाए ५० अभ्यर्थियों के बैच के साथ रहकर सेल्फ स्टडी के साथ सिविल सर्विसेज की तैयारी की। २०१० में परीक्षा दी और पहले प्रयास में सफलता हासिल की। २०११ में सिविल सर्विस ज्वाइन की। शिवप्रसाद मदन नकाते वर्तमान में राजस्थान के श्रीगंगानगर में कलेक्टर और इससे पहले बाड़मेर जिले के जिला कलेक्टर थे।
Summary
आई ए एस अफसर शिवप्रसाद मदन नकाते की सफलता की कहानी - Youth Express
Article Name
आई ए एस अफसर शिवप्रसाद मदन नकाते की सफलता की कहानी - Youth Express
Description
सफलता के पीछे अक्सर मेहनत और संघर्ष की कहानी छुपी होती है। जिनके इरादे, सपनों को साकार करने के लिए बनाए जाते हैं, उन्हें शायद कोई नहीं तोड़ सकता।
Author
Publisher Name
Youth Express
Publisher Logo

Ritika Seth

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

IND vs SA Head To Head in T20’S IPL 2022: STAT TRACKER