हितेश पंत (नई दिल्ली)
इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा कि 15 दिन बाद जिस बेटे की बारात में नाचना गाना था, उसी की शवयात्रा में शामिल होना पड़ा। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के सठिगवां गांव का माहौल बेहद गमगीन है। देश की रक्षा करते हुए बीएसएफ के जवान विजय पांडे जम्मू कश्मीर में शहीद हो गए। आज सोमवार को शहीद का शव उनके गांव पहुंचा और उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
सठिगवां गांव के बेटे विजय कुमार पांडे की अंतिम यात्रा में पूरे गांव की आंखें न थीं। हों भी क्यों न बड़े-बड़े ख्वाब सजा रखे थे उसकी शादी के। किसी ने सोचा भी न होगा कि 20 जून को जिसकी शादी में शामिल होना था उसी की अर्थी को कंधा देना पड़ेगा। विजय बीएसएफ में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। आजकल पोस्टिंग जम्मू कश्मीर के अखनूर सैक्टर में थी। रविवार देर रात पाकिस्तान की तरफ से फायरिंग हुई जिसमें विजय गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
बेटे की शहीद होने की खबर मिलते ही गांव में शौक भरा सन्नाटा पसर गया। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि हंसमुख स्वभाव का विजय यूं उनसे दूर हो गया है। जो घर 20 जून को होने वाले बेटे की शादी की तैयारी कर रहा था, वहां कोहराम मच गया। विजय का 15 जून को तिलक होना था और पूरा परिवार उन्हीं तैयारियों में व्यस्त था।
विजय के गांव के अलावा एक और गांव में इस खबर से वज्रपात सा हो गया। जिस गांव की लड़की से उनकी शादी होनी थी वहां भी शोक की लहर दौड़ पड़ी। फतेहपुर के ही बुढ़वा गांव की वंदना से विजय की शादी होनी थी। लेकिन नीयति को ये मंजूर नहीं था। वंदना के परिवार में हर कोई गमज़दा है। वंदना तो बदहोश हालत में है। हर कोई पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से में है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विजय की अपने पिता से शनिवार को इसी सिलसिले में बातचीत हुई थी। पिता ने बेटे को कहा कि कई तैयारियां करनी हैं। कार्ड बांटने और दूसरी तैयारियों के लिए कम समय बचा है। इसलिए तुम जल्दी छुट्टी लेकर चले आओ। विजय ने पिता को समझाया कि वो 10 जून तक घर पहुंच जाएगा और सारे काम समय पर हो जाएंगे। आप बस आपना खयाल रखिए।
बीएसएफ के अधिकारी सोमवार सुबह शहीद विजय का पार्थिव शरीर लेकर उनके घर पहुंचे। गांव वालों को बेटे की शहादत पर गर्व तो था लेकिन उससे ज्यादा दुख जवान बेटे की असमय मौत का था। हर किसी के आंखों में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रोश था। विजय की शवयात्रा में उनके अमर रहने के नारों के साथ पाकिस्तान के खिलाफ भी नारे लग रहे थे।