देश की रक्षा में भारतीय सेना का योगदान अतुल्य है। देश का अभिमान भारतीय सेना का आज 70वां स्थापना दिवस है। वैसे तो हर दिन सेना के प्रति सम्मान का होता है लेकिन आज का दिन इसलिए बेहद खास है क्योंकि आज ही भारतीय सेना की कमान पहली बार किसी भारतीय को मिली थी। इसलिए पूरा देश आज सेना को सलाम कर रहा है।
आज से 70 साल पहले भारतीय सेना पूरी तरह से आजाद हुई थी। 15 जनवरी 1948 को अंतिम अंग्रेज जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान वापस लेकर जनरल केएम करियप्पा को सौंपी गई। इस तरह जनरल करियप्पा देश के पहले भारतीय कमांडर इन चीफ बने। तब से पूरा देश इस दिन को भारतीय सेना के गौरव के रूप में धूमधाम से मनाता है। सैनिक को सम्मानित करके उनके मनोबल को बढ़ाने के प्रयास किए जाते हैं। देश आंतरिक या बाह्य कारणों से जब-जब परेशानियों में आया है, तब-तब भारतीय सेना ने ही हमें उन परेशानियों से उबारा है। अपना सब कुछ ताक पर रखकर सैनिक हमारी रक्षा के लिए डटे रहते हैं। आज बॉर्डर पर बेहद विपरीत परिस्थितियों में भारतीय सैनिक देश की रक्षा कर रहे हैं और हर दिन नई चुनौती का सामना करते हैं। लेकिन देश की रक्षा के लिए कोई कसर नहीं छोड़ते। ऐसे में जब देश के अंदर ही आतंकियों का समर्थन कर उनके लिए शहीद जैसे शब्दों का इस्तेमाल होता तो सेना का मनोबल जरूर नीचे होता है। सेना दिवस के इस खास दिन पर हम अगर सेना का मनोबल बनाए रखने का भी प्रण लें तो ये भारतीय सेना के लिए सच्चा सम्मान होगा।
