देश की रक्षा के लिए शहीद हुए सेना के एक जवान के बेटे ने वो कारमाना कर दिखाया कि आज हर किसी को उसकी मेहनत पर फ़क्र है। पिता के नक्शेकदम पर चलकर बेटे खुशाल सिंह ने सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपनी मां की आश पूरी कर दी। सिर्फ दो महीने की उम्र में पिता को खो देने वाले खुशाल का यह सफर इतना आसान न था।
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के निवासी सिपाही उत्तम सिंह नेगी 1996 को जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में सीमा पर तैनात थे। ऑपरेशन रक्षक में आतंकियों से लड़ते हुए उत्तम सिंह शहीद हो गये। उनकी मृत्यु के बाद परिवार चलाने की जिम्मेदारी पत्नी पद्मा नेगी पर आ गई। पिता की मृत्यु के समय खुशाल दो माह के थे। बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए मां पद्मा नेगी गांव से शहर की ओर आ गयी और किराए के कमरे में रहकर बच्चों को पढ़ाई शुरू कराई। उनके छोटे बेटे में बचपन से ही सेना प्रति विशेष लगाव था। सैनिक स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद खुशाल पहले ही प्रयास में एनडीए के लिए सेलेक्ट हो गये। तीन साल पुणे में कड़ी ट्रेनिंग लेने के बाद एक साल आईएमए देहरादून में ट्रेनिंग ली। रविवार 9 दिसंबर को वो लम्हा आ गया जो परिवार की खुशी के साथ – साथ दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन गया। आईएमए की पासिंग आउट परेड में अंतिम पग रखते ही खुशाल सिंह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गये। बेटे को अफसर की वर्दी में देखकर मां की खुशी का ठिकाना न था, मां की कड़ी साधना जो सफल हो गयी थी। लेफ्टिनेंट खुशाल सिंह का यह सफर सभी नौजवानों के लिए एक प्रेरणा है। लेफ्टिनेंट खुशाल सिंह और उनकी मां को यूथ एक्सप्रेस का सलाम।
