भगवान शिव के धाम ‘कैलाश’ के लिए रवाना हुआ यात्रियों का पहला दल

 

हितेश पंत (नई दिल्ली)

दुनिया की सबसे दुर्गम और कठिन यात्राओं में से एक कैलाश मानसरोवर यात्रा का शुभारंभ हो गया है। 60 यात्रियों का पहला जत्था लिपुलेख दर्रे से होता हुआ भगवान शिव के धाम पहुंचेगा। इस बार लिपुलेख दर्रे (उत्तराखंड) के रास्ते कुल 18 जत्थों को और नाथु ला दर्रे (सिक्किम) के रास्ते कुल 10 जत्थों को कैलाश मानसरोवर जाने की अनुमति मिली है।

 

 

विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने नई दिल्ली से कैलाश मानसरोवर जाने वाले पहले जत्थे को रवाना किया। यात्रा के लिए इस बार देशभर से कुल 3734 लोगों के आवेदन केंद्र सरकार के पास आए थे। इनमें से 1500 यात्रियों का चयन कम्प्यूटर बेस्ड लॉटरी द्वारा किया गया। इस बार लिपुलेख दर्रे से यात्रा के लिए 60-60 लोगों के 18 जत्थे तैयार किए गए हैं, जबकि नाथू ला दर्रे से यात्रा के लिए 50-50 लोगों के 10 जत्थे बनाए गए हैं।

 

लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी करने में 24 दिन लगेंगे। इस मार्ग से यात्रियों को अधिकतर दूरी पैदल तय करनी होती है। ये यात्रा प्रकृति के सौन्दर्य के साथ रोमांच का अनुभव किया जा सकता है। ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए ये सर्वोत्तम रास्ता है। वहीं नाथू ला दर्रे से यात्रा पूरी करने में 21 दिन लगते हैं। ये सड़क मार्ग है और गाड़ी से यात्रा की जा सकती है।

 

 

कैलाश मानसरोवर हिमालय के केंद्र में है। मान्यता है कि इस पवित्र स्थान पर भगवान शिव साक्षात विराजते है। कैलाश पर्वत समुद्र तट से 22068 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। ये पर्वत तिब्बत में पड़ने वाले हिमायल के उत्तरी क्षेत्र में है। तिब्बत चीन के हिस्से पर अपना अधिकार मानता है इसलिए ये पर्वत चीन की सीमा में आता है।

 

प्राकृतिक सुंदरता और श्रद्धा के रोमांच से भरी ये यात्रा विदेश मंत्रायल द्वारा हर साल जून से सितंबर के बीच आयोजित होती है। पिछले साल चीन से डोकलाम विवाद के चलते नाथूला दर्रे से यात्रा की अनुमति नहीं दी गई थी, लेकिन इस बार चीन ने आश्वस्त किया है कि यात्री नाथूला दर्रे का उपयोग कर सकेंगे।

 

 

ह्रदय और सांस के रोगी इस यात्रा में शामिल नहीं हो सकते। यात्रा पर जाने पहले सरकार द्वारा यात्रियों का दिल्ली में पूरा मेडिकल चैकअप कराया जाता है। रिपॉर्ट पॉजिटिव आने पर ही यात्रा पर जाने की अनुमति दी जाती है। यात्रा के लिए अप्लाई करने के बाद सरकार द्वारा यात्रियों को चुनने के लिए कम्प्यूटर बेस्ड लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

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One thought on “भगवान शिव के धाम ‘कैलाश’ के लिए रवाना हुआ यात्रियों का पहला दल

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