बिहार की जल परी: वैयक्तिक स्वतंत्रता या सम्वेदन हीनता
पिछले कुछ महीनों में बिहार एवं मध्य प्रदेश जैसे भारत के कई बड़े राज्यों ने भयंकर तबाही का सामना किया है। अत्याधिक बारिश से हज़ारों लोग मारे गए तो वहीं लाखों की तादाद में लोग बेघर हुए। खाने को अन्न नहीँ, रहने को छत नहीँ ये हालत किसी को भी भावुक कर देगी।
हाल ही में एक लड़की की तस्वीर सोशियल मीडिया में काफ़ी चर्चित रही। ये लड़की NIFT पटना की है। पेशे से मॉडल इस युवती ने बिहार में भरे बाढ़ के पानी के बीच अपना फोटो शूट कराया।” मर्मेड इन डिजास्टर” के सूत्र के साथ वाइरल इस फोटो ने एक विवाद खड़ा कर दिया।
जब हज़ारों लोग बिलख्ते हुए अपना घर छोड़ रहे थे, तब इनके चेहरे पर उत्साह और उमंग थी, जब लोगों के कपड़े पानी में बह रहे थे तब इनके मन में फोटो शूट के लिए सटीक ड्रेस व सैंडल्स की उहा पोह थी।
बात इतनी भर नहीँ है, हाँ किसी के व्यक्ति गत चुनाव पर हम रोक टोक नहीँ लगा सकते लेकिन एक बात जो चिन्तनीय है वो यह की हमारा युवा वर्ग किस तरफ़ जा रहा है।
अगर मुश्किल वक्त में युवा इसी तरह अपने दायरों में ही बँधे रहेंगे तो यह वैयक्तिक स्वतंत्रता से बढ़ कर सम्वेदन हीनता ही कहलाएगी। और ऐसी वैयक्तिक स्वतंत्रता सवाल खड़ा करती है हमारे शिक्षा व्यवस्था पर, हमारे संस्कारों पर और हमारे भविष्य पर।
इसकी एक वजह यह भी है की हम अपने अतीत को भुलाते जा रहे हैं, अगर सामूहिक हित की भावना ना होती तो भगत सिंह जैसे जवान अपने जीवन को बलिदान ना कर देते।
उचित एवं अनुचित समय का ज्ञान युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है। कई लोगों ने समर्थन करते हुए कहा की “इसमें बुरा क्या है, यह उसकी अपनी स्वतंत्रता है, और वो कर भी क्या सकती थी, क्या पानी निकालना शुरु कर देती उस इलाके का।” हमें समझना होगा की बात सिर्फ “बिहार के जलपरी” की नहीँ है,बल्कि जब युवा शक्ति एवं रच्नात्मक्ता से यदि सोशियल मीडिया का उपयोग किया जाए तो यही हमारे लिए रामबाण साबित हो सकता है।