केरल की हरियाली, इसके बैकवाटर से लेकर शांत घने जंगल और प्राकृतिक सुन्दरता के साथ-साथ पुराने मंदिर और उन मंदिरों से जुड़ी लोककथाएं, पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है। केरल की प्राकृतिक सुन्दरता को देखकर यहां घूमने आने वाले हर सैलानी के मुंह से एक बार जरूर निकलता है कि केरल वाकई में भगवान का घर है। केरल में घूमने के लिए कई लोकप्रिय जगहें हैं लेकिन आज हम जिस जगह की बात कर रहे हैं वह केरल का एक ऑफबीट लोकेशन है।
इनके नाम पर रखा गया था नाम
हम बात कर रहे हैं केरल के मुनरो आइलैंड की। मुनरो आइलैंड केरल के कोल्लम से करीब 27 किमी की दूरी पर मौजूद है। इस जगह का नाम त्रावणकोर रियासत के पूर्व रेसिडेंट कर्नल जॉन मनरो के नाम पर रखा गया है। कहा जाता है कि उन्होंने कई नहरें खुदवाकर कई बैकवाटर जगहों को एक-दूसरे से जोड़ दिया था। पिछले कुछ सालों के दौरान मुनरो आइलैंड को खासी लोकप्रियता मिली है।
खास बात
अष्टमुडी झील पर स्थित यह द्वीप पिछले कुछ सालों में धीरे-धीरे डूबता जा रहा है, जिस कारण इसे Sinking आइलैंड के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि माना जाता है कि पिछले कुछ सालों में बांध और नहरों के अधिक निर्माण की वजह से यह द्वीप डूब रहा है। अगर आपको किसी भी पर्यटन स्थल पर ऑफबीट डेस्टिनेशन में घूमना पसंद है तो निश्चित रूप से मुनरो आइलैंड को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें। चारों तरफ से प्राकृतिक हरियाली और सुन्दरता से घिरे इस आइलैंड की सुन्दरता को शब्दों में बयां कर पाना बहुत मुश्किल है।
दिखेगी हरियाली
मुनरो आइलैंड में घने पेड़ों से घिरे नहरों से होते हुए आप अष्टमुडी झील पहुंचेंगे। पूरे रास्ते आपको न सिर्फ हरियाली और हरे-भरे पेड़ बल्कि किंगफिशर और कई विलुप्त होती प्रजाति के पक्षी भी इधर-उधर पेड़ों की शाखाओं पर फुदकती नजर आएगी। अष्टामुडी लेक में पहुंचने के बाद पानी के ऊपर खुद से बने मैनग्रोव फॉरेस्ट के पेड़ों के झुरमुट और उनके बीच से होकर नाव से घूमने का लुत्फ उठाना मत भुलें।