हितेश पंत (नई दिल्ली)
ऑस्ट्रेलिया में होने जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने भी अपने अपने मुकाबलों के लिए कमर कस ली है। देश की असली दंगल गर्ल बबीता फोगाट अपने बेहतरीन प्रदर्शन को जारी रखने के लिए तैयार हैं। बबिता इस बार सोना जीतकर कॉमनवेल्थ खेलों में मैडलों की हैट्रिक पूरा करना चाहती हैं।
महिला पहलवान बबीता कुमारी फोगाट कॉमवेल्थ गेम्स में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करती आयीं हैं। दिल्ली में 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीता। उसके बाद ग्लास्गो में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में बबीता का प्रदर्शन और भी शानदार रहा। यहां उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। लगातार दो बार कॉमनवेल्थ में पदक जीतने के बाद बबीता का हौसला बुलंद है।
ऑस्ट्रेलिया के कोस्ट गोल्ड में 4 अप्रैल से शुरू होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए बबीता भारतीय पहलवानों में सबसे अनुभवी हैं। लंबे अनुभव के आधार पर कहा जा रहा है कि बबीता का इस बार भी मैडल जीतना तय है। भले ही पिछले कुछ समय से वो कोई अंतरराष्ट्रीय मैडल न जीत सकी हों, लेकिन उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में होने वाले मुकाबलों के लिए कड़ी मेहतन की है।
बबीता अपने पिता महावीर सिंह फोगाट और भारतीय पहलवान सुशील कुमार को अपना आदर्श मानती हैं। महावीर सिंह फोगाट खुद तो एक पहलवान रहे ही हैं। अपनी दोनों बेटियों को भी अखाड़े में लाकर सबके लिए प्रेरणा बने। उनकी दोनों बेटियां पिता की उम्मीदों पर खरी भी उतरीं।
बड़ी बेटी गीता फोगाट साल 2010 में दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। गीता 2012 में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी। छोटी बेटी बबीता भी कॉमनवेल्थ के साथ कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में पदक अपने नाम कर चुकी हैं। इस बार भी उनके पदक जीतने की काफी संभावनाएं हैं।