हितेश पंत (नई दिल्ली)
नीम सिर्फ एक वनस्पति नहीं बल्कि आयुर्वेदिक औषधि भी है। स्वाद में नीम भले ही कड़वा हो, लेकिन उसके फायदे किसी अमृत से कम नहीं हैं। नीम के तने से लेकर पत्तियां तक सब दवा के तौर पर काम करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार अगर आप नियमित रूप से एक गिलास नीम की पत्तियों का काढ़ा पीते हैं तो आपको पेट से संबंधित कोई बीमारी नहीं होगी।
नीम पेट के साथ अन्य शारीरिक परेशानियों से निजात दिलाने में भी कारगर है। यहां हम आपको नीम के कुछ आयुर्वेदिक उपचार बताएंगे। नीम को एक बेहतरीन एंटीसेप्टिक माना जाता है। त्वचा से संबंधित कई विकारों के लिए नीम रामबाण है। अगर त्वचा में फोड़े-फुंसी या कोई घाव है तो नीम की पत्तियों, उसकी छाल और फल को पीसकर इसका पेस्ट तैयार कर लें। प्रभावित त्वचा पर लगाने से तुरंत आराम मिलता है।
पथरी के इलाज के लिए भी नीम एक बेहतर दवा है। एक लीटर पानी में नीम की 150 ग्राम पत्तियां उबाल लें। दिनभर में इसे पी लीजिए। नियमित रूप से इसे उपयोग करने से गुर्दे और गॉलब्लैडर की पथरी निकल सकती है।
अनियमित खानपान कई बीमारियों का दावत देता है। डिब्बा बंद खाना और जंक फूड के बढ़ते उपयोग से पेट की कई बीमारियों बढ़ रही हैं। नीम की पत्तियों का रस शहद और काली मिर्च मिलाकर पीने से पेट के मर्ज का इलाज होता है। पीलिया में भी नीम बहुत लाभकारी है। पीलिया में नीम के रस में सौंठ मिलाकर पीने जल्द आराम मिलता है।
इसके अलावा नीम दांत और कानों के लिए भी बहुत हितकारी है। हर रोज नीम का दातून करने वालों के दांत मजबूत होने के साथ चमकदार भी होते हैं। नीम दांतों के कीटाणुओं को नष्ट करता है और मसूड़ों को दमदार बनाता है। नीम का रस कान में डालने से कान में दर्द की समस्या से निजात मिलती है।