भारतीय राष्ट्रीय खेल हॉकी में पिछले कुछ दशकों में खिलाड़ियों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है। मेजर ध्यान चंद्र के समय में हॉकी भारत के राष्ट्रीय खेल के रूप में विश्व विख्यात हुई थी। मेजर ध्यानचंद के रिटायर होने के कुछ वर्षों बाद से कुछ खास उन्नति नहीं हो पाई है। हाल ही में चल रहे हैं ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ऑस्ट्रेलिया की टीम को 3-0 से हराकर मैच को अपने नाम दर्ज किया। इस मैच में रणनीति की बात करें तो भारतीय हॉकी टीम की मुख्य रणनीति थी कि शुरुआत के दौर में लगातार आक्रमण करते हुए विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखना और अधिक से अधिक गोल कर लेने की कोशिश करना है।
भारतीय हॉकी टीम कि यह रणनीति कारगर साबित हुई और उन्होंने पहले क्वार्टर में ही तीन गोल मार लिए, जिससे विपक्षी टीम काफी पीछे हो गई। पिछले 8 महीनों से चोट की वजह से आराम कर रहे ड्रैग फ्लिकर रूपिंदर पाल सिंह ने शानदार वापसी करते हुए शुरुआत के 6 मिनटों में ही अपना पहला गोल कर दिया, इसके साथ ही स्ट्राइकर सुमित ने 12वें एवं 13वें मिनट में ही गोल मार दिया। लगातार इस तरह तीन गोल हो जाने से विपक्षी टीम पर दबाव बढ़ने लगा था, जो फायदेमंद साबित हुआ। भारतीय टीम के रूपिंदर पाल ले शार्ट कार्नर हासिल करते ही अपना पहला गोल लगाया।
भारतीय हॉकी टीम के ड्रैग फ्लिकर रूपिंदर पाल ने कई बार ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों से बॉल छीनकर गोल मारे हैं और इस तरह ही इस मैच के पहले क्वार्टर में ही 3-0 बढ़त बना लेने से टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। भारतीय टीम अपना अगला मैच सोमवार को खेलेगी, जिसको लेकर भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच ग्राहम रेड ने कहा है कि अगला मैच टीम के लिए मुश्किल होने की संभावना है, किंतु हम इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस जीत से टीम को मजबूती मिलेगी क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई टीम में सात सीनियर खिलाड़ी मौजूद हैं, जिनके सामने अच्छा प्रदर्शन करना वास्तव में सराहनीय है।

