ISRO ने अपने दूसरे चंद्रयान सफर के लिए कमर कस ली है| सोमवार दोपहर दो बजकर 43 मिनट पर इसरो का ‘बाहुबली’ रॉकेट Chandrayaan 2 को लेकर उड़ान भरेगा। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होने वाली इस लांचिंग के लिए रविवार शाम छह बजकर 43 मिनट पर काउंटडाउन शुरू किया गया। पहले यह प्रक्षेपण 15 जुलाई की सुबह दो बजकर 51 मिनट पर प्रस्तावित था। हालांकि प्रक्षेपण से घंटेभर पहले रॉकेट में गड़बड़ी के कारण अभियान को रोकना पड़ा था।
Chandrayaan 2 मिशन की पूरी जानकारी
कल चाँद की ओर इसरो का दूसरा यान जाएगा| चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने की जिम्मेदारी इसरो ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल- मार्क 3 (GSLV-MK 3) को दी है। इस रॉकेट को स्थानीय मीडिया से ‘bahubaali ‘ नाम दिया है। 640 टन वजनी रॉकेट की लागत 375 करोड़ रुपये है।
यह रॉकेट 3.8 टन वजन वाले चंद्रयान-2 को लेकर उड़ान भरेगा। Chandrayaan 2 की कुल लागत 603 करोड़ रुपये है। अलग-अलग चरणों में सफर पूरा करते हुए यान सात सितंबर को चांद के दक्षिणी धु्रव की निर्धारित जगह पर उतरेगा। अब तक विश्व के केवल तीन देशों अमेरिका, रूस व चीन ने चांद पर अपना यान उतारा है। 2008 में भारत ने चंद्रयान-1 लांच किया था। यह एक ऑर्बिटर अभियान था। ऑर्बिटर ने 10 महीने तक चांद का चक्कर लगाया था। चांद पर पानी का पता लगाने का श्रेय भारत के इसी अभियान को जाता है।
तीन हिस्सों में बंटा है चंद्रयान-2
Chandrayaan 2 के तीन हिस्से हैं-ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर। अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सम्मान में लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है। वहीं रोवर का नाम प्रज्ञान है, जो संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान। चांद की कक्षा में पहुंचने के बाद लैंडर-रोवर अपने ऑर्बिटर से अलग हो जाएंगे। लैंडर विक्रम सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव (South Pole)के नजदीक उतरेगा। लैंडर उतरने के बाद रोवर उससे अलग होकर अन्य प्रयोगों को अंजाम देगा। लैंडर और रोवर के काम करने की कुल अवधि 14 दिन की है। चांद के हिसाब से यह एक दिन की अवधि होगी। वहीं ऑर्बिटर सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए विभिन्न प्रयोगों को अंजाम देगा।
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