एपीजे अब्दुल कलाम ये वो पूजनीय व्यक्ति है जिनका नाम बच्चे-बच्चे को याद है | इनके वक्तित्व को किसी एक दायरे में नहीं रखा जा सकता है | इन्होने ने ज़िन्दगी के हर दाइत्व को बखूबी निभाया और ज़िन्दगी के हर पहलू पर खरे उतरे| वे देश के राष्ट्रपति रहे, एक महान विचारक रहे, लेखक रहे और वैज्ञानिक भी रहे| हर क्षेत्र में उनका अहम योगदान रहा| Apj Abdul Kalam जी का कहना था की – ‘‘ख़्वाब वह नहीं होते जो हम सोते में देखते हैं, बल्कि ख़्वाब वह होते हैं जो हमें सोने ही न दें’’| तो आज इस महान व्यक्ति के पुण्यतिथि पर हम आपको इनके जीवन के संघर्ष के रूबरू करवाएंगे
कलम साहब जिनका बहुत बड़ा योगदान रहा है आज भारत को इतनी उचाई तक पहुंचने में| आज से चार साल पहले 27 जुलाई को मेघालय के शिलांग में इनका निधन हुआ था|
Apj Abdul Kalam के संघर्ष से सफलता तक की कहानी
अब्दुल कलाम का जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम में 15 अक्टूबर को हुआ था| उनका परिवार नाव बनाने का काम करता था| कलाम साहब के पिता मछुआरों को नाव किराए पर दिया करते थे| बचपन से ही इनकी आंखें कुछ बनने का ख़्वाब देखती थी| हालांकि उस वक्त इनकी परिस्थियां इतनी अच्छी नहीं थी| वह स्कूल से आने के बाद कुछ देर तक अपने बड़े भाई मुस्तफा कलाम की दुकान पर भी बैठते थे, जो कि रामेश्वरम् रेलवे स्टेशन पर थी| फिर उन्होंने भाई शम्सुद्दीन के साथ अख़बारों को घर-घर पहुंचाने में उनकी मदद करने लगे| जब उन्होंने अपने पिता से रामेश्वरम् से बाहर जाकर पढ़ाई करने की बात कही तो उन्होंने कहा कि हमारा प्यार तुम्हें बांधेगा नहीं और न ही हमारी जरूरतें तुम्हें रोकेंगी| इस जगह तुम्हारा शरीर तो रह सकता है, लेकिन तुम्हारा मन नहीं|
फिर Apj Abdul Kalam जी ने 1950 में इंटरमीडिएट त्रिची के सेंट जोसेफ कालेज में नाम लिखाया| फिर उन्होंने ने बीएससी किया| लेकिन उन्हें बीएससी भाया है|फिर इन्होने इंजीनियरिंग करने का सोचा और ठान लिया की मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग में एडमीशन लेकर रहेंगे|
कलाम का विश्वास और मेहनत ही थी कि उन्हें दाखिला मिल गया | लेकिन 1000 रुपये इनके पास फीस देने को नहीं थे | फिर इनकी बड़ी बहन के अपने सरे गहने गिरवी रख के इनकी फीस के लिए पैसे दिए | कलाम ने ये सोच लिया था की अपने कामयी के पैसो से वो गहने छुड़ालाएगा| इसके बाद पढाई शुरू तो हुई लेकिन कॉलेज में जैसे-जैसे वक़्त बीतने लगा वैसे-वैसे विमानों में उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी. अब पायलट बनने का ख्याल दिल में आया|
अब इंजीनियरिंग की पढाई पूरी करने के बाद इनके सामने दो रास्ते थे| पहला एअरफ़ोर्स में पायलट बनने का ख़्वाब जो कलाम ने देखा था तो वहीं दूसरा रक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक बनने का | कलाम ने अपने ख्वाबों को तरजीह दी और एअरफ़ोर्स में पायलट के इन्टरव्यू के लिए दक्षिण भारत से उत्तर भारत रवाना हो गए|
इंटरव्यू में कलाम साहब ने हर प्रश्न का जवाब दिया लेकिन जब इंटरव्यू के परिणाम आए,जिसमे आठ लोग चुने गए और कलाम साहब का नंबर नौवां था| वह समझ गए हालात अभी मुश्किल होने वाले हैं| कलाम दिल्ली आकर एक जगह वैज्ञानिक के पद पर काम करने लगे तब उनका मासिक वेतन दो मात्र सौ पचास रूपये था| यहां वह विमान बनाने का काम करते थे| फिर तीन साल बाद ’वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान’ का केन्द्र बंगलुरू में बनाया गया और उन्हें इस केन्द्र में भेज दिया गया|
इसके बाद उन्हें उन्हें स्वदेशी हावरक्राफ़्ट बनाने की ज़िम्मेदारी दी गई जो काफी मुश्किल मानी जाती थी| लेकिन कलाम ने यह भी कर दिखाया| उन्होंने और उनके सहयोगियों ने हावरक्राफ़्ट में पहली उड़ान भरी| रक्षा मंत्री कृष्णमेनन ने कलाम की खूब तारीफ की और कहा कि इससे भी शक्तिशाली विमान अब तैयार करो| लेकिन जल्द कृष्णमेनन रक्षा मंत्रालय से हटा दिए गए और Apj Abdul Kalam साबह उन्हें दोबारा कमाल कर के नहीं दिखा पाए|
Apj Abdul Kalam ने बनाया पहला उपग्रह ‘नाइक अपाची’
फिर कलाम ने ‘इंडियन कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च’ का इंटरव्यू दिया| यहां उनका इंटरव्यू विक्रम साराभाई ने लिया लिया और वह चुन लिए गए| उनको रॉकेट इंजीनियर के पद पर चुना गया|
बस फिर क्या यही से इनके ख्वाबो को पर मिले और इन्हे NASA भेज दिया गया| नासा से आने के पहला उपग्रह बनने की जिम्मेदारी दी गयी| रॉकेट को पूरी तरह से तैयार कर लेने के बाद उसकी उड़ान का समय तय कर दिया गया, लेकिन उड़ान से ठीक पहले उसकी हाईड्रोलिक प्रणाली में कुछ रिसाव होने लगा| फिर असफ़लता के काले बादल घिरने लगे, मगर इन्होने से हार नहीं माननी| रिसाव को ठीक करने का वक़्त न हो पाने की वजह से कलाम और उनके सहयोगियों ने रॉकेट को अपने कंधों पर उठाकर इस तरह सेट किया कि रिसाव बंद हो जाए|
कलाम ने रॉकेट को कंधों पर नहीं उठाया था, बल्कि उस ज़िम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाया था जो उन्हें नासा से लौटने के बाद दी गई थी| फिर भारत के सबसे पहले उपग्रह ‘नाइक अपाची’ ने उड़ान भरी| रोहिणी रॉकेट ने उड़ान भरी और स्वदेशी रॉकेट के दम पर भारत की पहचान पूरी दुनिया में बन गई|
और यही से Apj Abdul Kalam साबह आसमन को छूते हुए हर कठिनाई को महेनत और लगन से पार करते चले गए|
देश के ऐसे ही महान व्यक्ति की कहनी Youth Express पर.



