हितेश पंत (नई दिल्ली)
उत्तराखंड प्रकृति का एक खास तोहफा है। यहां की वादियों में घूमना जन्नत की सैर से कम नहीं। प्रदेश के पहाड़ी इलाकों की तो बात ही निराली है। जब पूरा मैदानी क्षेत्र भीषण गर्मी से झुलस रहा हो, तब यहां की प्राकृतिक ठंडक का कोई मुकाबला नहीं। वैसे तो पूरे पहाड़ी क्षेत्र की यात्रा दिल-ओ-दिमाग को सूकून पहुंचाने की एक कुदरती दवा है। लेकिन आप पहाड़ों की खूबसूरती के साथ रोमांच और साहसिक यात्रा का अनुभव लेना चाहते हैं तो यहां के ग्लेशियरों से बेहतर विकल्प कोई नहीं। यहां के विख्यात ग्लेशियरों में से एक ‘पिंडारी’ की यात्रा में आपको ये सब कुछ मिलेगा।
बागेश्वर के कपकोट विकास खंड में स्थित पिंडारी हिमालयी क्षेत्र का एक बड़ा ग्लेशियर है। नंदादेवी और नंदकोट चोटियों के बीच पिंडर घाटी में ये ग्लेशियर स्थित है। अलकनंदा की सहायक पिंडर नदी का उद्गम स्थल यहीं है। इस ग्लेशियर की समुद्र तट से ऊंचाई 12,500 फीट है। इस ऊंचाई पर पहुंच के जो नजारे आपको मिलेंगे, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। बस इतना समझ लीजिए की ये ग्लेशियर एडवेंचर के शौकीनों और फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग है।
ट्रेकिंग आपका पैशन है तो पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक का नाम आपकी डेस्टिनेशन लिस्ट में टॉप पर होना चाहिए। अगर आप दिल्ली से पिंडारी ग्लेशियर जाना चाहते हैं तो कुमाऊं का आखिरी रेलवे स्टेशन काठगोदाम पहला पड़ाव है। यहां से आपको सड़क के रास्ते अल्मोड़ा होकर बागेश्वर पहुंचना होगा। जिला मुख्यालय बागेश्वर से गाड़ी की यात्रा करते हुए 38 किमी की दूरी तय करके बेस कैंप सौंग पहुंचाना होता है।
सौंग से पिंडारी ग्लेशियर का ट्रैक शुरू होता है। यहां से 3 किमी ट्रैकिंग कर लोहारखेत पहुंचते हैं। लोहारखेत से 11 किमी का बेहद कठिन ट्रेक पूरा कर धाकुड़ी कैम्प में रात्रि विश्राम की व्यवस्था रहती है। अगले दिन सुबह करीब 8 किमी लंबा ट्रेक शुरू होता है जो खाती पहुंचाता है। खाती से 11 किमी का ट्रैक पूरा कर द्वाली पहुंचते हैं। ये ट्रैक पिंडर नदी के किनारे घने जंगलों से होकर गुजरता है। द्वाली से 5 किमी की चढ़ाई पूरी कर फुरकिया पहुंचते हैं। यहां से नंदा देवी और अन्य हिमालयी रेंज का स्पष्ट नजारा सारी थकान मिटाने के लिए काफी है। फुरकिया में रात्रि विश्राम होता है।
फुरकिया से शुरू होती है स्वर्ग की अनुभूति वाले स्थल की फाइनल यात्रा। बुग्यालों से भरे करीब 7 किमी का ट्रैक पूरा कर पिंडारी ग्लेशियर जीरो प्वाइंट पहुंचते हैं। यहां की मखमली घास, रंग-बिरंगे फूल, नदी-झरनों की आवाज और हिमालय का विहंगम दृश्य आपको स्वर्ग की अनुभूति कराएगा। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं तो यकीन मानिए यहां पहुंचकर आपकी महीनों की थकान दूर हो जाएगी।
पिंडारी जीरो प्वाइंट की सम्पूर्ण सुंदरता देखनी है तो आपको यहां सूरज निकलने से पहले पहुंचना होगा। ग्लेशियर पर पड़ने वाली सुर्य की पहली किरणें इसकी सुंदरता पर चार चांद लगाती हैं। पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा मई के अंतिम सप्ताह से जून के दूसरे सप्ताह और सितंबर में बरसात पूरी होने के बाद चलती है। उसके बाद बर्फबारी के कारण ये यात्रा बंद हो जाती है। अगर शहरों की चिलचिलाती गर्मी से परेशान हैं और सूकून के साथ रोमांचभरी यात्रा करना चाहते हैं तो इस बार पिंडारी ग्लेशियर जाने का मन बना सकते हैं। यात्रा की पूरी जानकारी के लिए आप उत्तराखंड सरकार के कुमाऊं मंडल विकास निगम कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।




Lovely. Uttarakhand is indeed a heaven. This trek is no doubt one of the must for every adventure & nature lover. Beautifully articulated piece of writing. Explains the beauty well.
Really a heavenly place on earth to visit… And a beautiful article to cover it’s mesmerising beauty ..fine piece of writing..