हितेश पंत (नई दिल्ली)
भारतीय वायुसेना को और भी ताकतवर बनाने की प्रक्रिया एक कदम आगे बढ़ गई है। भारत ने एस-400 हवाई मिसाइल खरीदने के लिए रूस से बातचीत लगभग फाइनल कर ली है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ये डील करीब 40,000 करोड़ रुपए में हुई है। इस मिसाइल के वायुसेना में शामिल होने के बाद से चीन और पाकिस्तान को सबक सिखाना और भी आसान हो जाएगा। डील के पूरा होने में अमेरिका का एक कानून आड़े आ रहा है, जिसे जल्द निपटा लिया जाएगा।
भारत और रूस के बीच एस-400 डिफेंस सिस्टम को लेकर पिछले कई समय से बातचीत चल रही है। एस-400 मिसाइल सिस्टम बेहत ताकतवर प्रणाली है। ये मिसाइल 400 किमी दूरी पर भी दुश्मन के चिथड़े उड़ा सकती है। प्रमुख रूप से ये विमान को नष्ट करने वाली मिसाइल है। विमानों के साथ-साथ ये क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइल को नष्ट कर सकती है। हवा के साथ ही ये मिसाइल जमीन पर तबाही मचा सकती है।
एस-400 मिसाइल एफ35 फाइटर को भी गिराने की क्षमता रखती है। ये मिसाइल देश में होने वाले हवाई हमले को नाकाम करने में भी कारगर है। ये एक साथ 3 मिसाइलों को लांच कर सकती है। युद्ध की स्थिति में चीन और पाकिस्तान से होने वाले हवाई हमले से बचने के लिए ये मिसाइल काफी कारगर है। 400 किमी की रेंज में किसी विमान, मिसाइल या ड्रोन के खात्में में ये कारगर है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मिसाइल को खरीदने के लिए आर्थिक पक्ष पर भी बातचीन फाइनल हो चुकी है। लेकिन अमेरिका के कानून के चलते इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। डवर्थरीज थ्रू सेक्शंस एक्ट के तहत रूस पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। प्रतिबंद में कहा गया है कि जो देश रूस से रक्षा उपकरण खरीदेगा उसे दंड का सामना करना पड़ेगा। इसलिए दोनों देश अब इस कानून से बचने के लिए बीच का रास्ता तैयार कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ये डील फाइनल हो जाएगी।

