बेहद साधारण जीवन और अहिंसा के रास्ते पर चलकर भी अंग्रेज शासकों के पसीने छुड़ा देना। ये राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जीवन की सबसे बड़ी विशेषता है। बापू का जीवन हमें हमेशा का प्रेरणा देता है। आज ही के दिन इस महान व्यक्तित्व ने दुनिया से विदा ली थी। आज हम आपको महात्मा गांधी से संबंधित वो जानकारियां बताएंगे जो देश के युवाओं को मालूम होनी चाहिए।
महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। कुछ साल बाद उनका परिवार पोरबंदर से राजकोट आ गया। राजकोट में ही उनकी प्राथमिक शिक्षा हुई। उन्हें न तो खेलकूद में रुचि थी न ही वो किसी से ज्यादा बातचीत करते थे। सिर्फ 13 साल की उम्र में उनकी शादी कस्तूरबा से हो गई। कस्तूरबा अपने पति से उम्र में एक साल बड़ी थीं।
18 साल की उम्र में ही उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन पूरा कर लिया था। परिवार में पैसे की तंगी के कारण वो आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में उनके परिचित ने लंदन जाकर लॉ की पढ़ाई करने की सलाह दी। परिवार को मनाकर वे लंदन चले गए। इस बीच उनके बड़े बेटे का भी जन्म हो चुका था। महात्मा गांधी के चार बेटे थे।
लंदन से पढ़ाई पूरी के बाद वो भारत वापस आए। कुछ वक्त के बाद ही देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में सक्रिय हो गए। उन्होंने अहिंसा के रास्ते पर चलकर स्वतंत्रता आंदोलन चलाया और अपने आंदोलनों से अंग्रेजों के नाक में दम कर दिया। 6 जुलाई 1944 को पहली बार सुभाष चंद्र बोस ने रेडियो रंगून से महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था।
30 जनवरी 1948 को जब उनकी मृत्यु हुई तो उनकी शव यात्रा करीब 8 किमी लंबी थी जिसमें लाखों लोग शामिल हुए थे। विदेशी भी महात्मा गांधी से काफी प्रभावित रहे हैं। यही कारण है कि विदेशों में 48 सड़कें महात्मा गांधी के नाम से हैं।
महात्मा गांधी के ये संदेश हर युवा की जीवन में बेहद अहम है।
“जिंदगी का हर दिन ऐसे जीना चाहिए जैसे कि यह तुम्हारे जीवन का आखिरी दिन होने वाला है।”
“यदि मनुष्य सीखना चाहे, तो उसकी हर भूल उसे कुछ शिक्षा दे सकती है।”
“आपको खुद में ऐसे बदलाव करने चाहिए जैसा आप दुनिया के बारे में सोचते हैं।”
“किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने का प्रयास गौरवशाली होता है न कि उस तक पहुंचना।”
“आप प्रत्येक दिन अपने भविष्य की तैयारी करते हैं।”
युवाओं को इस तरह प्रेरित करता है महात्मा गांधी का जीवन